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बढ़ रहा Haemophilia का खतरा

बढ़ रहा Haemophilia का खतरा

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world haemophilia day: भले ही इसे शाही बीमारी कहा जाता है पर यह एक ऐसी घातक बीमारी है जिसका कोई माकूल इलाज नहीं। दरअसल यह ज्यादातर राजपरिवारों में ही पाई गई इसलिए इसे शाही बीमारी का नाम दे दिया गया। समस्या यह है कि यह आनुवंशिक होने के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चों में पहुंचती है। इसका आश्चर्यजनक पक्ष यह है कि इस बीमारी के लक्षण तो पुरुषों में पाए जाते हैं पर इसकी संवाहक महिलाएं होती हैं।

सबसे पहले यह बीमारी ब्रिटिश राज घराने में पाई गई उसके बाद पेरिस और चीन के राजवंश में इसके प्रभाव पाए गए। धीरे-धीरे यह बीमारी सामान्य लोगों में भी फैल गई। आज के दौर में यह भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गई है। यहां जन्म लेने वाले दस हजार बच्चों में एक बच्चा इस बीमारी से अवश्य पीड़ित होता है। इस बीमारी के शिकार लोगों के रक्त का थक्का नहीं बनता और निरंतर रक्तस्राव ही उनकी मौत का कारण बन जाता है।


world haemophilia day: समय से उपचार न होने पर जा सकती है जान

माता-पिता से बच्चों में पहुंचने वाली इस बीमारी का जीन एक्स क्रोमोसोम पर लिंक होता है। पुरुषों में जहां एक्स-वाई क्रोमोसोम होता है वहीं महिलाओं में एक्स-एक्स। पुरुषों में इसके लक्षण दिखाई देते हैं जबकि स्त्रियां इसकी संवाहक होती हैं। ऐसे पीड़ितों को जरा सी चोट लगने पर भी बहुत सारा खून बह जाता है। यहां तक कि आंतरिक अंगों से भी रक्तश्राव संभव है। समय से उपचार न होने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। इस रोग से ग्रस्त ज्यादातर मरीज बचपन में ही मर जाते हैं। और 70 प्रतिशत बड़े रोगियों में इस बीमारी की पहचान तक नहीं हो पाती। जागरुकता के लिए 17 अप्रैल हीमोफीलिया दिवस तय किया गया है।

इधर, काफी रिसर्च करने के बाद जेनेटिक इंजीनियरिंग के विकास के आधार पर इसका उपचार संभव हुआ है। यह उपचार काबुलेशन फैक्टर को ट्रांस फ्यूज करके किया जाता है। जहां काबुलेशन फैक्टर की उपलब्धता नहीं है वहां फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा से इसका उपचार होता है। इसका अभी कोई बेहतर और माकूल इलाज नहीं है, इसलिए कुछ सतर्कताएं अपेक्षित हैं। जरूरी है कि माता-पिता और शिक्षक इस बात पर ध्यान दें कि यदि किसी बच्चे को चोट लगने के बाद अधिक रक्तस्राव होता है या रक्त का थक्का बनने में 4-5 मिनट से अधिक लगता है तो वह हीमोफीलिया का शिकार हो सकता है। ऐसे में तत्काल जांच कराकर उपचार शुरू कर देना चाहिए। हीमोफीलिया की जांच मेडिकल कालेजों में हिमैरिलॉजी डिपार्टमेंट में होती है।

Homeopathy के इलाज में भरोसा व धैर्य जरूरी

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