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Health Day : कितना ख्याल रखते हैं आप अपना …

Health Day : कितना ख्याल रखते हैं आप अपना …

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स्वास्थ्य हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा है। स्वस्थ होना सबके हित की बात है। इसे ही ध्यान में रखते हुए 7 अप्रैल का दिन विश्व स्वास्थ्य को  समर्पित है। गौरतलब है कि सात अप्रैल 1948 को ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना की गई थी। तब से अब तक इसे पूरे मनोयोग से हर देश में  संचालित किया जा रहा है। इस संगठन की परिकल्पना लगभग सात दशकों से चली आ रही है हर साल यह संगठन एक थीम लेकर सामने आता है तथा उसी के आधार पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
World Health Dayआज के दौर की सबसे बड़ी समस्या यही है कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति भारी लापरवाही बरती जा रही है। व्यस्तता और तनाव से भरी जिंदगी में स्वास्थ्य पर कोई ध्यान ही नहीं दे पा रहा। लगातार के काम और तनाव ने स्वाभाविक जीवन शैली को ही छीन लिया है। हालांकि इस दिवस पर लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों का आयोजन होता है। जागरूकता कैंप लगाए जाते हैं और कार्यशालाएं आयोजित होती हैं, गोष्ठियां होती हैं और इनके जरिए भरसक लोगों को  आगाह करने की पूरी कोशिश की जाती है कि वे अपने तथा परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
इन प्रयासों से काफी हद तक लोगों में  जागरूकता आई भी है, पर अक्सर समय पर रोग का पता नहीं चलता और सारे प्रयास व्यर्थ  हो जाते हैं। किसी भी रोग में अगर पहले ही रोकथाम कर ली जाए तो कितनी ही परेशानियों से निजात मिल सकती है। अपेंडिक्स, लीवर में पस होना, एसीडिटी की समस्या आजकल आम है  और कार्य व्यस्तता में इस पर ध्यान न देते हुए ज्यादातर लोग परेशान हैं। समस्याएं मुख्यरूप से अनियंत्रित और अनियमित खानपान, प्रदूषण के कारण उत्पन्न होती हैं। दूषित पानी और तनाव के कारण गैस, एसीडिटी  होती है। लीवर के रोग अल्कोहल लेने से होते हैं। जरूरी है कि सबसे पहले तो फास्टफूड से परहेज करें,वक्त पर संयमित खाना लें और यह घर का बना हो तो बेहतर है।
स्वच्छ पानी का प्रयोग करें। दूषित पानी हमेशा ही संक्रामक रोगों का संवाहक होता है। मोटापा न बढ़ने दें, वर्ष में एकबार पूरा चेकअप करवाएं और नियमित व्यायाम करें। अल्कोहल का सेवन बिल्कुल न करें यह लीवर को खराब कर देता है।प्रदूषण से बचना आवश्यक है। इस लिए ऐसी जगहों में जाने पर नाक पर रूमाल रखें या मास्क का उपयोग करें। इस सब के अलावा पहली आवश्यकता तो यही है कि अपने आसपास प्रदूषण होने ही न दें इससे एलर्जी होती है और सायनस हो जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन बिना अधिक खर्च किए बेहतर चिकित्सा देने की बात करता है पर हमें भी अपना बचाव तो करना चाहिए।

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