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हमारी विरासतें : इन्हें न करें नजरअंदाज

हमारी विरासतें : इन्हें न करें नजरअंदाज

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World Heritage Day : किसी भी राष्ट्र का इतिहास उसके वर्तमान और भविष्य की नींव होता है। विश्व विरासत के स्थल किसी भी राष्ट्र की सभ्यता और उसकी प्राचीन संस्कृति के परिचायक माने जाते हैं। पहला विश्व विरासत दिवस 18 अप्रैल, 1982 को ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ मान्यूमेंट्स एंड साइंस द्वारा मनाया गया। इस दिवस का प्रत्येक व्यक्ति के लिए बड़ा महत्व है। हमने अपने पूर्वजों की विरासतों को एक हद से अधिक नजरअंदाज किया है जिसका परिणाम यह हुआ कि विरासतें हमसे दूर होती चली गईं। यहां तक कि उनका अस्तित्व भी संकट में पड़ गया।

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में जागरूकता लाने के लिए इस दिवस की शुरुआत की गई। गौरतलब है कि विश्व धरोहरों के मामले में भारत का दुनिया में एक महत्वपूर्ण स्थान है और यहां के करीब ढ़ाई दर्जन से अधिक ऐतिहासिक स्थल यूनेस्को के विश्वधरोहर की सूची में शामिल हैं।


World Heritage Day: इस तरह की विरासतों में 3 श्रेणियां आती हैं –

  • पहला प्राकृतिक धरोहर स्थल है जो भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत सुंदर या वैज्ञानिक महत्व की जगह या भौतिक और भौगोलिक महत्व वाली जगह जो कि विलुप्तता की कगार पर खड़े जीव या वनस्पति का प्रकृतिक आवास हो सकती है।
  • दूसरे नंबर पर सांस्कृतिक धरोहर स्थल आता है इसमें स्मारक स्थापत्य की इमारतें, मूर्तिकारी, चित्रकारी, प्राचीन शिलालेख, गुफा आवास और वैश्विक महत्व वाले स्थान, अकेली इमारतें या आपस में संबद्ध इमारतों का समूह शामिल है।
  • मिश्रित घरेलू स्थल इनमें प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों ही रूपों में महत्वपूर्ण जगहें आती हैं।
  • हिमाचल में कुल्लू स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क काफी बड़े दायरे में फैला हुआ है। यहां दो वन्यजीव अभयारण्य भी हैं।

इसके अलावा प्रदेश की कालका शिमला रेलवे भी विश्वविरासत में शामिल है। इसकी शुरुआत 1903 में हुई। इसके मार्ग में छोटी बड़ी 103 सुरंगें और छोटे बड़े 869 पुल और 18 स्टेशन हैं, पर हमारे पास ऐसा कौन सा स्मारक है जिसे विश्व विरासत में जगह मिल सके। बहरहाल विश्व विरासत की दौड़ में अब वंडर ऑफ द वर्ल्ड के नाम से विख्यात बेजोड़ शिल्प वाला रॉक कट टेंपल मसरूर है। एक अखंड चट्टान पर इंडो आर्यन शैली में बना है और इसकी तुलना एलोरा के मंदिरों से की जाती है। एकल चट्टान को तराशकर बनाया गया उत्तरी भारत का यह अकेला ऐसा मंदिर है। पूरे भारत में ऐसे मंदिर कुल चार जगहों पर हैं महाबलिपुरम के रथ मंदिर, एलोरा का कैलाश मंदिर राजस्थान में धमनार का मंदिर और कांगड़ा का मसरूर मंदिर।

रथमंदिर और कैलाश मंदिर जहां द्रविड़ शैली में बने हैं वहीं मसरूर और धमनार के मंदिर नागर शैली में निर्मित हैं। तुलना में मसरूर अपने प्रतिद्वंद्वी से श्रेष्ठ ठहरता है।यह 15 मंदिरों का गौरव रखता है जबकि धमनार में 8 मंदिर ही हैं। धमनार निचली भूमि पर है जबकि मसरूर का भव्य संसार 2500 फुट की ऊंची पर्वत शृंखला पर स्थित है। यह एक बेहद खूबसूरत लैंडस्केप पर चित्र की तरह लगता है। अगर यह विश्व विरासत में शामिल हो जाए तो हिमाचल विश्व में इस दुर्लभ वास्तुशिल्प की वजह से भी जाना जाएगा।

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