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मिस्र की गौरव गाथा कहते ‘पिरामिड’

मिस्र की गौरव गाथा कहते ‘पिरामिड’

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भारत की तरह ही मिस्र की सभ्यता भी बहुत पुरानी है और प्राचीन सभ्यता के अवशेष वहां की गौरव गाथा कहते हैं। मिस्र की गौरव गाथा कहते यहां के पिरामिड आज तक रहस्य बने हुए हैं। पिरामिडों का रहस्य जानने की नए सिरे से कोशिश हो रही है। इन पिरामिडों का इतिहास करीब 4500 से 5000 वर्ष पुराना है।

यूं तो मिस्र में 138 पिरामिड हैं और काहिरा के उपनगर गीजा में तीन। हालांकि जमीन में अभी भी इतने ही और पिरामिड दबे हुए हैं। गीजा का ‘ग्रेट पिरामिड’ ही प्राचीन विश्व के 7 अजूबों की सूची में शामिल है। यह पिरामिड 450 फीट ऊंचा है। लगभग 4,000 वर्षों तक यह दुनिया की सबसे ऊंची संरचना रहा है। स्फिंक्स की उस प्रतिमा को देख कर आश्चर्य होता है, जिसमें एक आदमी का सिर है और शेर का धड़। यह प्रतिमा है ग्रेट स्फिंक्स की जो काहिरा से 12 किलोमीटर की दूरी पर मिस्र के मरुस्थल में स्थित है। इस प्रतिमा की आंखें काफी रहस्यात्मक हैं तथा इसकी अभिव्यक्ति बहुत आकर्षक है। इसकी आंखें मरुस्थल को एक रहस्यात्मक श्रेष्ठता से घूरती हुई दिखाई देती हैं।


स्फिंक्स की प्रतिमा महान पिरामिड के मुख्य भवन के बाईं ओर एक चट्टान में बनाई गई है। इसकी ऊंचाई लगभग 20 मीटर है और लम्बाई 70 मीटर। इसका निर्माण मिस्र के राजा खफ्रे के कार्यकाल के दौरान हुआ था। अब सवाल यह उठता है कि स्फिंक्स का निर्माण क्यों किया गया था। स्फिंक्स एक मिथकीय दैत्य था। यूनानी लोगों का मानना था कि इसका सिर एक स्त्री का और पंखों सहित इसका धड़ शेर का था। मिस्त्र के लोगों का मानना था कि इसका धड़ शेर का और बिना पंखों वाला तथा छाती वाला हिस्सा एक पुरुष का। ऐसा माना जाता था कि स्फिंक्स पिरामिडों के आसपास स्थित श्मशान से सभी शैतानी ताकतों को दूर भगा देगा ।

अंटार्कटिका में पिरामिड

रेडियो रूस की वेबसाइट के अनुसार अमेरिका और योरप के वैज्ञानिकों ने सन 2013 में बर्फीले अंटार्कटिका में 3 पिरामिडों की खोज की है जिनमें से 1 पिरामिड तो समुद्र तट के पास ही है, लेकिन 2 पिरामिड तट से 16 किलोमीटर दूर समुद्र में डूबे हुए हैं। ये तीनों ही पिरामिड मानव द्वारा निर्मित हैं, क्योंकि हजारों वर्ष पहले अंटार्कटिका का यह क्षेत्र बर्फीला होने की जगह पेड़-पौधों और हरियाली से पटा हुआ था। यहां उस काल में मनुष्य रहता था। अंटार्कटिका की भूमि पर घने जंगल हुआ करते थे और तरह-तरह के जीव-जंतु भी रहते थे। आज अंटार्कटिका महाद्वीप का एक बहुत बड़ा हिस्सा बर्फ की मोटी पर्त से ढका है।

पावागढ़ की पहाड़ी पर कालिका माता मंदिर

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