Covid-19 Update

1,99,740
मामले (हिमाचल)
1,93,403
मरीज ठीक हुए
3,411
मौत
29,762,793
मामले (भारत)
178,254,136
मामले (दुनिया)
×

कमाल है दो बूंद जिंदगी की 

कमाल है दो बूंद जिंदगी की 

- Advertisement -

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 27 मार्च, 2014 को पूरे दक्षिण एशिया को पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया। इसी के तहत भारत भी इस बीमारी से छुटकारा पा गया। यह पाया गया कि भारत में अब पोलियो का प्रभाव नहीं है। यह 13 जनवरी, 2014 को घोषित किया गया था। इसके बाद से हर वर्ष विश्व पोलियो दिवस 24 अक्टूबर को विश्वभर में मनाया जाता है। इस बात को तीन साल हो चुके हैं अब तक कोई भी पोलियो का नया मामला सामने नहीं आया है।

स्वास्थ्य सेवाओं की तमाम खामियों और संसाधनों की कमी के बावजूद यह उपलब्धि फक्र की बात है। यह दो बूंद जिंदगी की दी हुई सौगात है जो हमारी नई नस्ल को मिली है। यह ऐसा नारा था जिसने पूरे हिंदुस्तान को बदल कर रख दिया और आने वाली नस्ल को नई सुबह की सौगात दी। हम अब राहत की सांस ले सकते हैं  हालांकि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अभी भी पोलियो खत्म नहीं हुआ है। इन मुल्कों से पोलियो का वायरस देश में घुसपैठ कर सकता है। कहना न होगा कि यह मात्र भारत सरकार की ही नहीं, जनता की भी कामयाबी है जिसने पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।


दरअसल पोलियो भारत में महामारी की तरह एक बड़ा खतरा बन चुका था, पर इस खतरे का सामना सम्मिलित प्रयास ने किया और उस पर विजय पाई। देश में 1981  में पोलियो के 38090 मामले  थे जो 1987 में कम होकर 28264 रह गए। इसके बाद 2009 में  कुल 741 मामले थे  और 2010 में यह तादाद 43 ही रह गई। वैसे यह आंकड़ा भी कम नहीं था क्योंकि दुनिया में तबतक पोलियो का नमोनिशान तक मिट चुका था और मात्र कुछ ही देश इसके प्रभाव में थे। उनमें भारत भी था जहां पोलियो का दानव  बच्चों को अपना शिकार बना रहा था। फिर इसे चुनौती की तरह लेकर इस अभियान को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाया जाने लगा। हम कह सकते हैं कि दुनिया में कहीं भी इतने बड़े पैमाने पर इतने कामयाब अभियान की मिसाल और कहीं नहीं है।

सालाना 6 से आठ बार पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम हर कार्क्रम में 17 करोड़ बच्चों को वैक्सीन 24 लाख पोलियो कार्यकर्ता1.5 लाख कर्मचारी  और सालाना 1000करोड़ रूपए का बजट। ये आंकड़े उस विराट अभियान के हैं जो पूरी दुनिया के सामने एक बेमिसाल नजीर की हैसियत रखता है। इस अभियान में   फिल्मी सितारे और नामी शख्सियतें भी जुड़ीं और आखिरकार सबकी  कई साल की अथक मेहनत ने रंग दिखा दिया। पल्स पोलियो के इस अभियान में उन कार्यकर्ताओं का  भी अमूल्य योगदान रहा  जिन्होंने घर-घर जाकर पांच साल तक के बच्चों को दो बूंद जिंदगी की पिलाईऔर आने वाले कल को स्वस्थ बनाने में मदद की। फिलहाल अब दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में भारत उन 11 देशों में शामिल है जिसे वाइल्ड पोलियो विषाणु से  मुक्त प्रमाणित किया गया है। किसी भयंकर बीमारी से निपटने का यह जज्बा अनोखा ही था और इतिहास में दर्ज किया जाने वाला भी।

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है