Expand

हिमाचल का पर्यटन

हिमाचल का पर्यटन

- Advertisement -

हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। इसे लगभग विश्व के सभी संगठन देश मनाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना है। यह एक सुखद अनुभूति है कि इतनी मुश्किलों और असुविधाओं के बावजूद भारत में पर्टन कम नहीं हुआ है। अगर हम देश में पर्यटन से कुछ भी आय अर्जित कर रहे हैं तो यह यहां की शांति व्यवस्था के कारण है। कुछ नई सोचें भी रंग लाई हैं जैसे कि पैलेस ऑन व्हील्स ने विदेशों में भी झंडे गाड़ दिए हैं। देश की इस शाही रेलगाड़ी को तीसरा हॉस्पिटैलिटी इंडिया इंटरनेशनल अवार्ड मिला है। राजस्थान पर्यटन का यह प्रयास दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर भारत का नाम रोशन करने वाला माना गया है।

worldसन 2002 से शुरू अतुल्य भारत अभियान हिमालय, वन्यजीव और अंतरराष्ट्रीय समूह का ध्यान खींचा। इसके तहत पर्यटन स्थल हवाई अड्डों से भी जुड़े और संभावनाओं के नए द्वार खुल गए। गौरतलब है कि विशेष सुविधाएं न होते हुए भी हिमाचल में पर्यटकों का आमद संतोषजनक है। हिमाचल अपनी खूबसूरती के कारण सबसे ज्यादा पर्यटन खींचता है। इसमें भी लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक होते हैं। बढ़ते पर्यटन व्यवसाय से ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर मिले हैं। हिमाचल खूबसूरत हिल स्टेशंस वाला प्रदेश है और भारत का टॉप पर्यटन स्थल है। शिमला, कुल्लू, मनाली, सिरमौर, किन्नौर, डलहौजी, नारकंडा और कसौली पर्यटकों में काफी लोकप्रिय हैं। कश्मीर में बढ़ते आतंकवाद की वजह से पर्यटकों का रुख हिमाचल की तरफ हो गया है पर अगर स्पष्ट कहें तो इस मौके का फायदा नहीं उठाया गया। यहां देवदारों के जंगल और पुरसुकून मौसम, ट्रैकिंग तथा पिकनिक के काफी अवसर देते हैं। प्रकृतिक खूबसूरती, सुहाना मौसम और यहां के लोगों का मैत्रीपूर्ण व्यवहार पर्यटकों में सुरक्षा का विश्वास जगाता है। महामहिम दलाईलामा की वजह से मैकलोडगंज में भारी विदेशी पर्यटन है पर यहीं सारा समीकरण गड़बड़ा जाता है।

world-tourism-day-3हजारों साल पुराने चंबा के मंदिर इतना समृद्ध सांस्कृतिक महत्व होते हुए भी पर्यटन नहीं खींच पाते। खजियार सचमुच स्विट्जरलैंड का मुकाबला करता है, पर सुविधाओं केअभाव में पिकनिक स्पॉट बन कर रह गया है। हां, शक्तिपीठ अवश्य भरे-पूरे हैं। यानी कि हमारे पास धार्मिक, साहसी खेलों, पैराग्लाइडिंग, वाटर स्पोर्ट्स जैसे कितने ही पर्यटन हैं पर उनका सही दोहन नहीं गिया गया। ऊंचाइयों पर कितने ही ऐसे स्थान और मंदिर हैं जहां रोप वे के अभाव में पर्यटक पहुंच ही नहीं पाते। हर शहर में लाख प्रयत्न करने के बावजूद कचरे से निजात नहीं मिलती फिर ट्रैफिक जाम का इलाज किसके पास है। टूटी-फूटी सड़कों की हालत दहशत पैदा कर देती है। रोज दुर्घटनाएं देखकर दिल दहल जाता है। थलौट का हादसा अभी तक भूला नहीं है। यातायात व्यवस्था सही हो और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद हो तो हिमाचल का पर्यटन चमक सकता है पर व्यवस्था तो प्रशासन को ही करनी होगी।

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Google+ Join us on Google+ Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper



सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है