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सर्वनाश तो हमने किया

सर्वनाश तो हमने किया

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विश्व वन्यजीव दिवस 3 मार्च को मनाया जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में जागरुकता, सहयोग और समन्वय स्थापित करना है। यही नहीं, यह दिन हमें वन्य जीवों के प्रति बढ़ रहे अपराधों के प्रति तत्काल कदम उठाने को प्रेरित करता है। वन्य जीवों के संरक्षण के लिए पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक सहयोग भी जरूरी है। सन 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व में संभावित खतरे को देखते हुए अपने 68वें अधिवेशन में प्रति वर्ष वन्यजीव दिवस मनाने का निर्णय लिया। वन हमारे लिए प्रकृति का ऐसा वरदान है जिस पर हमारा अस्तित्व, उन्नति एवं समृद्धि निर्भर है।

गौरतलब है कि प्राकृतिक वन और उसमें विचरण करने वाले जीव, बिना मानवीय सहायता के जीवित रह सकते हैं, जबकि मानव समाज इनके अभाव में अपना अस्तित्व कायम नहीं कर सकता। प्राकृतिक संसाधनों और वन्य प्राणी संरक्षण के बारे में जितनी अच्छी सोच प्राचीन भारतीय समाज को रही है उतना संसार की किसी अन्य सभ्यता में नहीं रही, पर आज उस सोच का सौवां हिस्सा भी हमारे देश में नहीं है। एक और एहसान वन्य जीवों का मानवों पर है कि वैज्ञानिक किसी भी तरह का प्रयोग वन्य जीवों पर ही करते हैं मधुमक्खियां और पशुपक्षी परागण और बीज वितरण में सहायक होते हैं। इस तरह पर्यावरण का संतुलन भी बना रहता है और यह सब एक प्राकृतिक क्रियान्वयन के तहत बना रहता है मानवीय स्वार्थ की वजह से प्राकृतिक वन क्षेत्र घटते जा रहे हैं और वृक्षों की अनेक प्रजातियां नष्ट हो चुकी हैं।

कितने ही सुंदर पक्षियों की प्रजातियां लुप्त हो चुकी हैं मानव ने वन्य जीवों का शिकार इतनी निर्ममता से किया कि कुछ दुर्लभ वन्य प्राणियों की प्रजातियां हमेशा के लिए समाप्त हो गईं और कुछ अभी भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमने वन काटे और लगातार वन्य प्राणियों के घर उजाड़ते रहे। पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया और इससे मौसम का चक्र टूट गया जिसके फलस्वरूप धरती पर पेय जल की कमी हो गई और प्राकृतिक आपदाओं ने अपना ठिकाना ही बना लिया। अब अगर पर्यावरण सुरक्षा और वन्य जीवों सुरक्षा के लिए पूरा विश्व चिंतित है तो इसका जिम्मेदार कौन है? सर्वनाश तो हमने ही किया है। भले ही अब नई-नई योजनाएं बन रही हैं पर इस समस्या को इस स्थिति तक पहुंचाने के जिम्मेदार हम ही हैं। वन्य जीव एक ओर जंगल के विकास में सहायक होते हैं वहीं दूसरी ओर सघन जंगल वर्षा को आकर्षित करते हैं। जंगल की सघनता वन्य जीवों की बहुलता पर निर्भर करती है। अगर मानव को अपना अस्तित्व बनाए रखना है तो जंगल और वन्यप्राणियों को बचा कर ही रखना है।

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