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आज आंवले के पेड़ की पूजा करेंगे तो होगी मनोकामना पूरी

आज आंवले के पेड़ की पूजा करेंगे तो होगी मनोकामना पूरी

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कार्तिक शुक्ल नवमी अक्षय नवमी व आंवला नवमी के नाम से जानी जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष का पूजन, दर्शन, आंवले का सेवन अक्षय पुण्य की प्राप्ति देने वाला है। भगवान विष्णु की पूजा के लिए यह बेहद शुभ दिन माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन पूजा-पाठ करने से यह जन्म ही नहीं बल्कि अगले कई जन्म सुधर जाते हैं और हमें अक्षय लाभ की प्राप्ति होती है।कैसे उत्पन्न हुआ था आंवलाः जब पूरी पृथ्वी जलमग्न थी और इस पर जिंदगी नहीं थी, तब ब्रह्मा जी कमल पुष्प में बैठकर निराकार परब्रम्हा की तपस्या कर रहे थे। इस समय ब्रह्मा जी की आंखों से ईश-प्रेम के अनुराग के आंसू टपकने लगे थे। इन्हीं आंसूओं से आंवला का पेड़ उत्पन्न हुआ, जिससे इस चमत्कारी औषधीय फल की प्राप्ति हुई। ज्योतिषाचार्य पं दयानन्द शास्त्री के अनुसार रविवार, विशेष रूप से सप्तमी तिथि पर आंवले का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही, शुक्रवार और माह की प्रतिपदा तिथि, षष्ठी, नवमी, अमावस्या तिथि और सूर्य के राशि परिवर्तन वाले दिन आंवले का सेवन न करें


अक्षय नवमी की पूजा सामग्रीः फल, फूल धूप,अगरबत्ती, दीपक व देसी घी,दान के लिए अनाज, तुलसी के पत्ते, कुमकुम, हल्दी, सिंदूर, अबीर, गुलाल नारियलएकत्र कर लें। प्रातःकाल स्नान करके किसी ऐसे मंदिर या स्थान पर जाएं, जहांआंवले का पेड़ हो। उसके बाद पूजन की सभी सामग्री लेकर आंवले के पेड़ के नीचे बैठ जाएं और पेड़ की जड़ में दूध चढ़ाएं। इसके पश्चात् वृक्ष के तने पर तिलक लगाएं। तिलक लगाकर धूप-दीप जलाएं और आंवले के पेड़ के सात फेरे लेते हुए पेड़ के तने पर कच्चा सफ़ेद धागा या मौली लपेटें। पूजन समाप्त होने के बाद प्रार्थना करें और फिर आंवले के पेड़ के नीचे भोजन करें।


आंवला का महत्वः आचार्य चरक के मुताबिक आंवला एक अमृत फल है, जो कई रोगों का नाश करने में सफल है। साथ ही विज्ञान के मुताबिक भी आंवला में विटामिन सी की बहुतायता होती है। जो कि इसे उबालने के बाद भी पूर्ण रूप से बना रहता है। यह आपके शरीर में कोषाणुओं के निर्माण को बढ़ाता है, जिससे शरीर स्वस्थ बना रहता है।

”वय:स्थापन” यह आचार्य चरक कहते हैं. अर्थात सुंदरता को स्तंभित (रोक कर) करने के लिए आंवला अमृत है। बूढ़े को जवान बनाने की क्षमता केवल आंवले में है। आंवला एकमात्र वह फल है, जिसे उबालने पर भी विटामिन ‘सी’ जस-का-तस रहता है। च्यवनप्राश में सर्वाधिक आंवले का प्रयोग होता है। इसे कम-ज्यादा प्रमाण में खाने से कोई नुकसान नहीं है, फिर थोड़ा-सा शहद डाल कर खाने से अति उत्तम स्वास्थ्य-लाभ होता है.। आयुर्वेद में आंवले को त्रिदोषहर कहा गया है। यह वात, पित्त, कफ इन तीनों को नियंत्रित रखता है।

ज्योतिषाचार्य पं. दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस दिन पानी में आंवले का रस मिलाकर स्नान करने की परंपरा है। ऐसा करने से हमारे आसपास से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है, सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता बढ़ती है, साथ ही ये त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद है। आंवले के रस से त्वचा की चमक भी बढ़ती है।

क्या करें कि लाभदायी हो आंवला नवमी

  • प्रातः काल पूर्वाभिमुख होकर आंवले के वृक्ष की जड़ में ॐ धात्र्ये नमः बोलते हुये दूध अर्पित करने से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते है।
  • संतान प्राप्ति हेतु आंवले के वृक्ष के नीचे पति-पत्नी साथ बैठकर भगवान लक्ष्मी नारायण का पूजन कर उन्हें पीले पुष्प अर्पित करें,ब्राह्मणों को भोजन करवा कर पके कुष्मांड में यथा शक्ति रत्न,स्वर्ण, रजत या धन्य भरकर दान दे ।
  • इस दिन व्यापार में लाभ प्राप्ति हेतु लाल व पीले सुत वस्त्र से, स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति हेतु सफेद सुत वस्त्र लेकर 108 परिक्रमा कर, तांबे का दीपक दान करे।
  • भौतिक लाभ पाने के लिए आपको अक्षय नवमी के दिन सोना, चांदी या अन्य मूल्यवान रत्न खरीद सकते हैं। अगर कोई प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो आज ही के दिन रजिस्ट्री कराएं।

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