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शनि जयंती विशेष : कुंडली में बैठे हैं शनि तो जरूर करें इस विधि से पूजा

शनि जयंती विशेष : कुंडली में बैठे हैं शनि तो जरूर करें इस विधि से पूजा

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शनि जिन्हें कर्मफलदाता माना जाता है, दंडाधिकारी कहा जाता है और न्यायप्रिय माना जाता है। शनि (Shani) अपनी दृष्टि से राजा को भी रंक बना सकते हैं। हिंदू धर्म में शनि देवता भी हैं और नवग्रहों में प्रमुख ग्रह भी जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में बहुत अधिक महत्व मिला है। शनिदेव को सूर्य का पुत्र माना जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को ही सूर्यदेव एवं छाया (संवर्णा) की संतान के रूप में शनि का जन्म हुआ। शनि जयंती का पर्व हिंदू पंचांग (Hindu Panchang) के ज्येष्ठ के महीने में अमावस्या को मनाया जाता है। इस वर्ष शनि जयंती 10 जून को मनाई जाएगी।

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मान्यता है कि ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनिदेव का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन शनि जयंती मनाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन शनिदेव की सच्चे मन से अराधना व पूजा-पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन शनिदेव से संबंधित चीजों का दान करने से शनि की महादशा में लाभ मिलता है।करीब 148 साल बाद शनि जयंती के दिन सूर्य ग्रहण लग रहा है। खास बात यह है कि शनि जयंती के दिन ही वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा।।

शनि जयंती पर शनिदेव की पूजा की जाती है। यह उन व्यक्तियों के लिए सबसे ज्यादा खास पर्व होता है जिनकी कुंडली में शनि की साढ़े साती और शनि की ढैय्या चल रही होती है, क्योंकि शनि दोष से पीड़ित व्यक्ति यदि इस दिन पूजा-पाठ (Worship) करता है तो उसे शनि दोष से मुक्ति मिल जाती है। शनि राशिचक्र की दसवीं व ग्यारहवीं राशि मकर और कुंभ के अधिपति है। जहां एक ओर शनि किसी भी राशि में लगभग 10 महीने तक रहते हैं वहीं दूसरी ओर शनि की महादशा का काल 19 साल तक का होता है।

ऐसा कहा जाता है कि शनि एक क्रूर और पाप ग्रह होते हैं और वो अशुभ फल भी देते हैं लेकिन ये भी माना जाता है कि असल जिंदगी में ऐसा नही है क्योंकि शनि न्याय करने वाले देवता हैं और वो कर्म के हिसाब से कर्मफल देने वाले दाता हैं। वे बुरे कर्म करने वाले लोगों को बुरी सजा और अच्छे कर्म करने वाले को अच्छा परिणाम (Good results) देते हैं। भारतीय वैदिक ज्योतिष में शनिदेव को न्याय तथा मृत्यु का देवता माना जाता है। इनका वर्ण काला है यही कारण इनको काला रंग बहुत ही पसंद है। ज्योतिष में इनको तीसरी सप्तम तथा दशम दृष्टि दी गई है।

शनि सबसे धीरे-धीरे चलने वाला ग्रह है। योगी और तपस्वी का जीवन व्यतीत करना इन्हे बहुत ही पसंद है, यही कारण है कि शनि की दशा में व्यक्ति मोक्ष की बात करने लगता है। शनि जयंती के दिन भारत में स्थित प्रमुख शनि मंदिरों में भक्त शनि देव से संबंधित पूजा-पाठ करते हैं तथा शनि पीड़ा से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। इस दिन उपरोक्त मंत्र का जप कम से कम एक माला जरूर करना चाहिए –

ॐ प्रां प्रीं प्रौ स: शनये नमः॥
अथवा
ॐ शं शनैश्चराय नमः।

इस विधि से पूजन कर करें शनिदेव को प्रसन्न

शनिदेव की पूजा भी अन्य देवी-देवताओं के जैसे ही होती है। इनके लिए कुछ अलग नहीं करना होता है। शनि जयंती के दिन उपवास भी रखा जाता है। व्रत वाले दिन सुबह उठने के बाद दैनिक क्रिया कलापों को करके स्नान किया जाता है। जिसके बाद लकड़ी के एक पाट पर साफ-सुथरे काले रंग के कपड़े या नए काले रंग के कपड़े को बिछाकर शनिदेव की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए। अगर शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर आपको पास न हो तो एक सुपारी के दोनों ओर शुद्ध घी व तेल का दीपक और धूप जलाना चाहिए। उसके बाद उस स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करवाना चाहिए। सिंदूर, कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल आदि के साथ-साथ नीले या काले फूल शनिदेव को चढ़ाना चाहिए। इमरती व तेल से बने पदार्थों को व श्री फल के साथ-साथ अन्य फल भी आप शनिदेव को चढ़ा सकते हैं। पूजा करने के बाद शनि मंत्र की एक माला का जाप करना चाहिए और फिर शनि चालीसा का पाठ भी करना चाहिए। अंत में शनिदेव की आरती करके पूजा संपन्न करना चाहिए।।

 

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इन कर्मों से कर सकते हैं शनि देव को प्रसन्न

 

  • अपने मता पिता, विकलांग तथा वृद्ध व्यक्ति की सेवा और आदर-सम्मान करना चाहिए।
  • हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए।
  • दशरथ कृत शनि स्तोत्र का नियमित पाठ करे।
  • कभी भी भिखारी, निर्बल-दुर्बल या अशक्त व्यक्ति को देखकर मज़ाक या परिहास नहीं करना चाहिए।
  • शनिवार के दिन छाया पात्र (तिल का तेल एक कटोरी में लेकर उसमें अपना मुंह देखकर शनि मंदिर में रखना) शनि
  • मंदिर में अर्पण करना चाहिए। तिल के तेल से शनि देव शीघ्र ही प्रसन्न होते है।
  • काली चीजें जैसे काले चने, काले तिल, उड़द की दाल, काले कपड़े आदि का दान सामर्थ्यानुसार नि:स्वार्थ मन से किसी
  • गरीब को करे ऐसा करने से शनिदेव जल्द ही प्रसन्न होकर आपका कल्याण करेंगे।
  • पीपल की जड़ में केसर, चंदन, चावल, फूल मिला पवित्र जल अर्पित करें।
  • शनिवार के दिन तिल का तेल का दीप जलाएं और पूजा करें।
  • सूर्योदय से पूर्व शरीर पर तेल मालिश कर स्नान करें।
  • तेल में बनी खाद्य सामग्री का दान गाय, कुत्ता व भिखारी को करें।
  • शमी का पेड़ घर में लगाए तथा जड़ में जल अर्पण करे।
  • मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।

शनि देव की पूजा से होने वाले लाभ

 

मानसिक संताप दूर होता है।
घर गृहस्थी में शांति बनी रहती है।
आर्थिक समृद्धि के रास्ते खुल जाते है।
रुका हुआ काम पूरा हो जाता है।
स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या धीरे धीरे समाप्त होने लगती है।
छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलती है।
राजनेता मंत्री पद प्राप्त करते है।
शारीरिक आआलस्यपन दूर होता है।

पंडित दयानंद शास्त्री, उज्जैन (म.प्र.) (ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)

09669290067, 09039390067

 

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