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कार्तिक पूर्णिमा पर ऐसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न, बरसेगा धन

कार्तिक पूर्णिमा पर ऐसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न, बरसेगा धन

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कार्तिक मास बहुत पुण्य प्रदान करने वाला मास माना जाता है। कहते हैं कि कार्तिक के समान दूसरा कोई मास नहीं।ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार कार्तिक मास में शुद्ध घी, तिलों के तेल और सरसों के तेल का दीपक जलाने से अश्वतमेघ यज्ञ जितना पुण्य प्राप्त होता है। इस माह में दीपदान करने से भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं। इस महीने में लक्ष्मी जी के समक्ष दीप जलाने का भी अत्यधिक महत्व है। यह दीप जीवन के अंधकार को दूर कर, आशा की रोशनी देने का प्रतीक माना जाता है।

कार्तिक माह में घर के मंदिर, नदी के तट एवं शयन कक्ष में दीप जलाने का बड़ा महत्व माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा मां लक्ष्मी को अत्यन्त प्रिय है। इस दिन मां लक्ष्मी की आराधना करने से जीवन में खुशियों की कमी नहीं रहती है।कार्तिक पूर्णिमा को प्रात: 5 बजे से 10:30 मिनट तक मां लक्ष्मी का पीपल के वृक्ष पर वास रहता है। इस दिन जो भी जातक मीठे जल में दूध मिलाकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाता है उस पर मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है।


कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रातः काल उठकर व्रत करने का संकल्प लें। गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान कीजिए। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। श्री रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें। इस पवित्र दिन पर चंद्रोदय के समय शिवा, सम्भूति, प्रीति, अनुसुइया तथा छमा इन 6 कृतिकाओं का पूजन करें। कार्तिक पूर्णिमा के गरीबों को चावल दान करने से चन्द्र ग्रह शुभ फल देता है। इस दिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, शहद व गंगाजल मिलकार चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा को घर के मुख्यद्वार पर आम के पत्तों से बनाया हुआ तोरण अवश्य बांधें। वैवाहिक व्यक्ति पूर्णिमा के दिन भूलकर भी अपनी पत्नी या अन्य किसी से शारीरिक संबंध न बनाएं, अन्यथा चन्द्रमा के दुष्प्रभाव आपको व्यथित करेंगे। कार्तिक पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा के उदय होने के बाद खीर में मिश्री व गंगा जल मिलाकर मां लक्ष्मी को भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें। मां लक्ष्मी को गन्ना, अनार व सीताफल चढ़ाए। सम्भव हो तो इस दिन मंदिर में भंडारा करवाएं। ध्यान रखें दीपदान संध्याकाल में ही करें।

शाम के समय ‘वसंतबान्धव विभो शीतांशो स्वस्ति न: कुरू’ मंत्र बोलते हुए चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान श्रेष्ठ कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के संबंध में ऋषि अंगिरा ने लिखा है कि इस दिन सबसे पहले हाथ-पैर धो लें फिर आचमन करके हाथ में कुशा लेकर स्नान करें।

यदि स्नान में कुश और दान करते समय हाथ में जल व जप करते समय संख्या का संकल्प नहीं किया जाए तो कर्म फलों से सम्पूर्ण पुण्य की प्राप्ति नहीं होती है। दान देते समय जातक हाथ में जल लेकर ही दान करें।स्नान करने से असीम पुण्य मिलता है गृहस्थ व्यक्ति को तिल व आंवले का चूर्ण लगाकर स्नान करने से असीम पुण्य मिलता है। विधवा तथा सन्यासियों को तुलसी के पौधे की जड़ में लगी मिट्टी को लगाकर स्नान करना चाहिए। इस दौरान भगवान विष्णु के ऊं अच्युताय नम:, ऊं केशवाय नम:, ऊॅ अनंताय नम: मन्त्रों का जाप करना चाहिए।

पंडित दयानन्द शास्त्री, (ज्योतिष-वास्तु सलाहकार), उज्जैन, मध्यप्रदेश

 

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