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WWF की रिपोर्टः बाढ़ और सूखे के कारण गंगा नदी का वजूद खतरे में

WWF की रिपोर्टः बाढ़ और सूखे के कारण गंगा नदी का वजूद खतरे में

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नई दिल्ली। वर्ल्ड वाइड फंड (WWF) की एक रिपोर्ट आई है। इसमें भारत की जीवनदायिनी गंगा को दुनिया की सबसे ज्यादा संकटग्रस्त नदी बताया गया है। भारत में 2,071 किलोमीटर लंबी गंगा नदी उत्तराखंड से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन में गिरने से पहले 10 लाख वर्ग किलोमीटर इलाके में लोगों और जमीन दोनों की प्यास बुझाती है।

लेकिन WWF का कहना है कि गंगा में लगातार बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है। एक ओर तो गंगा नदी के तटीय इलाकों में बन रही ग्लोबल वॉर्मिंग की स्थिति इसके लिए जिम्मेदार है तो दूसरी ओर लगातार बढ़ रही मानवीय बसाहट के चलते गंगा में हर रोज लाखों लीटर दूषित पदार्थ डाला जा रहा है। इससे गंगा नदी मैली हो रही है।

क्या हुआ गंगा की सफाई का वादा ?

बीजेपी की केंद्र सरकार 2014 में गंगा की सफाई का वादा करके भी सत्ता में आई थी। लेकिन एक और रिपोर्ट यह कहती है कि गंगा ऋषिकेश से ही प्रदूषित हो रही है। गंगा किनारे लगातार बसायी जा रही बस्तियों चन्द्रभागा, मायाकुंड, शीशम झाड़ी में शौचालय तक नहीं हैं। इसलिए यह गंदगी भी गंगा में मिल रही है। कानपुर की ओर 400 किमी उलटा जाने पर गंगा की दशा सबसे दयनीय दिखती है। इस शहर के साथ गंगा का गतिशील संबंध अब बमुश्किल ही रह गया है। ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगा के किनारे परमाणु बिजलीघर से लेकर रासायनिक खाद तक के कारखाने लगे हैं, जिसके कारण गंगा लगातार प्रदूषित हो रही है।

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