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कहीं तकिया बीमार तो नहीं कर रहा आपको , जांच करें और बदल दें

तकिेए की औसतन उम्र 18 से 24 महीने होती है

कहीं तकिया बीमार तो नहीं कर रहा आपको , जांच करें और बदल दें

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दिनभर काम करने के बाद रात को सुकून की नींद बहुत जरूरी है ताकि आप अगले दिन के लिए फ्रेश हो जाए और काम शुरु कर सकें। कई बार ऐसा होता है कि हम सुबह उठते हैं और शरीर थका- थका सा रहता है। चाहकर कुछ भी नहीं कर पाते। इसी एक बड़ी वजह आप का तकिया भी हो सकता है। एक जमाना था जब एक जैसे तकिए मिलते थे, लेकिन अब तकिए की भी बहुत सारी वैराइटी बाजार में मौजूद है। इसलिए पहले आप अपने तकिए को अच्छी तरह से जांच लें, अगर आप को महसूस हो रहा है कि अगर तकिया सही नहीं है तो तुरंत बदले लें। वैसे तो तकिए का काम गर्दन को सपोर्ट देने और शरीर के पॉश्चर को सही बनाए रखना होता है। खराब गुणवत्ता वाला या फिर पुराना तकिया इस्तेमाल करने से आप की मांसपेशियों में दर्द हो सकती है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आपके तकिये की हाल सही है। अगर वो सही हालत में नहीं है तो आप को तकिया तुरंत बदले देना चाहिए।

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अगर आपके तकिए में गांठें पड़ गई हों या उसके अंदर भरी गई रूई या फॉम एक ओर हो जाता हो, तो समझ जाएं कि उसे बदलने का अब सही समय आ गया है।

किए को इस्तेमाल करने से पहले अगर आपको उसे हाथों से शेप देने की जरूरत पड़ती हो, तो जान लें कि आपका तकिया खराब हो चुका है। ध्यान रखें, तकिए की शेप जैसे ही बिगड़ने लगे, उसे तुरंत बदल डालें। वैसे को तकिेए की औसतन उम्र 18 से 24 महीने होती है। हर दो साल में अपना तकिया जरूर बदलें।

आपका तकिया इस्तेमाल करने योग्य है या नहीं, इसका पता आप एक साधारण टेस्ट करके भी लगा सकते हैं। इसके लिए आप अपने तकिए को बीचोंबीच मोड़ें और 30 सेकेंड्स तक दबाकर छोड़ दें। यदि तकिया दोबारा अपनी शेप नहीं लेता, तो समझ जाएं कि आपको अपना तकिया बदलने की जरूरत है।

आपका तकिया ऐसा होना चाहिए जो सोते समय आपकी पीठ और गर्दन दोनों को सहारा दे। ऐसा तकिया जो बहुत कठोर, बहुत लंबा या बहुत नरम होता है वह आपकी गर्दन को विषम स्थिति में डालकर आपकी पीठ और गर्दन में दर्द का कारण बन सकता है। ऐसे में तकिया ऐसा चुनें जो आपके सिर को थोड़ा ऊंचा रखते हुए आपकी गर्दन, पीठ, सिर और कंधों को सपोर्ट करे।

कई बार गलत तकिये का इस्तेमाल आपको मानसिक समस्या भी दे सकता है। यदि तकिया कड़क है तो यह आपके मस्तिष्क पर बेवजह दबाव बना सकता है जिससे मानसिक विकार की संभावना बढ़ जाती है।

कई बार गलत तकिये का इस्तेमाल आपको मानसिक समस्या भी दे सकता है। यदि तकिया कड़क है तो यह आपके मस्तिष्क पर बेवजह दबाव बना सकता है जिससे मानसिक विकार की संभावना बढ़ जाती है।

गलत ऊंचाई का तकिया आपकी गर्दन में कमजोरी ला सकता है। ऊपरी सर्वाइकल स्पाइन के कारण सोकर उठते समय सिर दर्द, चक्कर आना या मिचली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।यदि आप एक ही करवट में सोते हैं या आपका तकिया सही सपोर्ट नहीं देता है तो इससे कंधे के निचले हिस्से पर सारा भार आ जाता है।

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