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पैरेंट्स के बचपन का तनाव डाल सकता है अगली पीढ़ी पर असर

आनुवंशिक रूप से बच्चों में चला जाता है आपका तनाव

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नई दिल्ली। यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति का बचपन स्वाभाविक और सुखद हो।लोगों के बचपन के दौरान बहुत सारी स्थितियां ऐसी भी होती हैं जिनके प्रभाव से बच्चों का बच निकलना मुश्किल ही होता है। जिसमें माता-पिता का अलगाव होना, तलाक होना, उनमें से किसी एक की मौत हो जाना, या घर में लगातार हो रही घरेलू हिंसा के गवाह बनना अथवा यौन उत्पीड़न का शिकार होना।

ये सारी ऐसी बातें होती हैं जो किसी के भी बचपन को भावनात्मक और शारीरिक रूप से आहत करती हैं। ऐसे में जब ये बच्चे स्वयं अभिभावक की भूमिका में आते हैं तो इसके दुष्परिणाम उनके बच्चों को झेलने पड़ते हैं। हाल ही में किए गए एक शोध में पाया गया है कि बचपन में इस स्थिति से गुजरने वाले बच्चे बड़े होकर भी शारीरिक और मानसिक अस्वस्थता के शिकार रहते हैं।

खतरनाक स्थिति तो तब बन जाती है जब यह अस्वस्थता अगली पीढ़ी में भी आनुवंशिक रूप से चली जाती है। बता दें कि अगर मातापिता अपने बचपन में अत्यंत विषम परिस्थितियों से गुजरते हैं तो उनके बच्चों में यह जोखिम दोगुना हो जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि एक मां के बचपन के अनुभव का प्रभाव बच्चे पर पिता के मुकाबले ज्यादा होता है। ऐसे माता-पिता में मानसिक अस्वस्थता के साथ गुस्सा भी ज्यादा होता है। यह अध्ययन साबित करता है कि किस तरह माता-पिता का गुजरा हुआ बुरा वक्त बच्चे को भी हानि पहुंचा सकता है।

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