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सरकारी नौकरी छोड़ इन्होंने शुरू किया मशरूम का व्यवसाय और कायम की मिसाल

सरकारी नौकरी छोड़ इन्होंने शुरू किया मशरूम का व्यवसाय और कायम की मिसाल

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जिला ऊना के नंगल संलागड़ी निवासी यूसुफ खान प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए मिसाल हैं। कृषि विभाग के आत्मा प्रोजेक्ट में काम करने वाले यूसुफ खान ने नौकरी छोड़ कर वर्ष 2000 में मशरूम का व्यवसाय शुरु किया। मशरूम के व्यवसाय से आज न सिर्फ यूसुफ पैसा कमा रहे हैं बल्कि उनके साथ काम करने वाले 10-15 लोगों की आजीविका भी मशरूम के कारोबार से ही चल रही है। शुरूआत में यूसुफ ने नंगल सलांगड़ी में एक यूनिट स्थापित किया जिसे धीरे-धीरे विकसित करने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की। आज वह प्रतिदिन 3-4 क्विंटल मशरूम की पैदावार कर रहे हैं। जिसे वह 120 रूपए से लेकर 150 रूपए प्रतिकिलो तक के हिसाब से बाजार में बेचते हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार के उद्यान विभाग की मदद से आज वह न सिर्फ मशरूम उगा रहे हैं बल्कि मशरूम का बीज और कंपोस्ट भी तैयार कर रहे हैं। मशरूम यूनिट के लिए वर्ष 2007 में उन्होंने 10 लाख का ऋण लिया और इसके बाद उन्होंने वर्ष 2019 में कंपोस्ट यूनिट के लिए 20 लाख रुपए का लोन लिया, जिस पर प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें 40 प्रतिशत सब्सिडी मिली। यूसुफ बताते हैं कि उद्यान विभाग की ने उन्हें मशरूम के व्यवसाय को खड़ा करने में भरपूर मदद प्रदान की। सरकार की विभिन्न योजनाओं तथा विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह के कारण ही वह मशरूम उत्पादन में कामयाबी की नई सीढ़ियां चढ़ रहे हैं।


यूसुफ खान का कहना है कि अब उनके पास 6 ग्रीन हाउस हैं। मुख्यमंत्री ग्रीन हाउस नवीकरण योजना के तहत वर्ष 2011-12 में प्रदेश सरकार से उपदान लिया था जिस पर उन्हें 80 प्रतिशत सब्सिडी प्राप्त हुई थी। मशरूम के साथ-साथ अब वह शिमला मिर्च व टमाटल भी उगा रहे हैं, जिन्हें बेचकर उन्हें कमाई का अतिरिक्त साधन मिल गया है। आज यूसुफ प्रगतिशील किसानों को मशरूम उगाने का प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं। किसानों, प्राइवेट संस्थाओं, युवक मंडलों व स्वयं सहायता समूहों के अलावा स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियों को भी मशरूम व सब्जियों की पैदावार से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। उनका ट्रेनिंग सेंटर नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। यूसुफ ने बताया कि वर्ष 2010 में बहरीन सरकार की ओर से इस प्रकार के प्रशिक्षण के लिए उन्हें आमंत्रित किया था तथा बहरीन सरकार ने उन्हें अवार्ड देकर सम्मानित भी किया है। यूसुफ खान का कहना है कि बेरोजगार युवकों को भी स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए, जिससे कि वह अपने लिए आजीविका का अच्छा साधन ढूंढ सकते हैं। कई बार मेहनत का फल देरी से मिलता है परंतु मनुष्य का फर्ज है कि वह मेहनत करना न छोड़े तभी सफलता कदम चूमेगी।

मशरूम यूनिट के लिए मिलती है सब्सिडी

उद्यान विभाग के उप निदेशक डॉ. सुभाष चंद ने बताया कि हिमाचल खुंब विकास योजना के तहत प्रदेश सरकार 20 मीट्रिक टन की क्षमता वाला यूनिट लगाने के लिए अधिकतम 8 लाख रुपए की सब्सिडी तथा एक लाख रुपए का घरेलू यूनिट लगाने के लिए 50 हजार रुपए की सब्सिडी प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा कंपोस्ट यूनिट लगाने को 40 प्रतिशत तथा मशरूम बीज की लैब स्थापित करने को अधिकतम 6 लाख रुपए की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

 

 

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