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जीरो TB Project: निर्वासित तिब्बत Govt ने भी शुरू की मुहिम

जीरो TB Project: निर्वासित तिब्बत Govt ने भी शुरू की मुहिम

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Zero TB Project : धर्मशाला। पीएम नरेंद्र मोदी ने जहां देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाने को लेकर अभियान शुरू किया है, वहीं अब निर्वासित तिब्बती सरकार ने भी तिब्बती समाज से टीबी को दूर करने की मुहिम शुरू की है। निर्वासित तिब्बती सरकार ने इस गंभीर बीमारी के उन्मूलन के लिए जीरो टीबी प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत तिब्बती स्टूडेंटस को टीबी रोग के प्रति जागरूक करने के लिए  स्कूल स्टाफ, स्कूलों में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारियों का सहयोग लिया जाएगा।

 431 तिब्बती हर साल हो रहे  इस बीमारी का शिकार

बच्चों के अलावा तिब्बती युवाओं में भी TB और मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) TB चिंता का विषय बनता जा रहा है, वहीं इस बीमारी का इलाज भी एक चुनौती बनता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार भारत में निर्वासन का जीवन व्यतीत कर रहे निर्वासित तिब्बतियों में से 431 तिब्बती हर साल इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी की मुख्य वजह निर्वासन में रह रहे तिब्बतियों का रहन-सहन और खानपान है। हालांकि तिब्बती समुदाय ने इस रोग पर काफी हद तक काबू पा लिया है, लेकिन तिब्बती बच्चों में आज भी यह रोग एक गंभीर विषय बना हुआ है।  विशेषज्ञों के अनुसार तिब्बतियन स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के खान-पान को लेकर खासा ध्यान रखने की आवश्यकता है। इसे लेकर तिब्बतियन डाक्टर्स ने हॉस्टल वार्डन व स्कूल स्टाफ को बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।

निर्वासित तिब्बत सरकार के शिक्षा मंत्री नोगदुप छेरिंग का कहना है कि जीरो टीबी अभियान के तहत डेलेक अस्पताल के सहयोग से टीबी रोग उन्मूलन के लिए तिब्बतियन स्कूलों व युवाओं में जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। तिब्बतियों में टीबी और एमडीआर टीबी गंभीर विषय बनता जा रहा है और इस बीमारी के उन्मूलन के लिए समुदाय के हर वर्ग को साथ चलना होगा। निर्वासित तिब्बत सरकार के स्वास्थ्य सचिव चुक्या द्रानई का इस बारे में कहना है कि पिछले तीन दशक से डेलेक अस्पताल टीबी उन्मूलन में प्रयास सराहनीय रहे हैं। निर्वासित तिब्बतियों को टीबी रोग से बचाने में इस अस्पताल की अहम भूमिका रही है।

दलाईलामा ने दी शुभकामनाएं 

तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाईलामा ने अपने संदेश में जीरो टीबी प्रोजेक्ट को लेकर अपनी शुभकामनाएं दी हैं और उम्मीद जताई है कि तिब्बतियों में यह बीमारी उस तरह से नहीं फैलेगी, जिससे जान का नुकसान हो।

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