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हिमाचल में फोरलेन जमीन मुआवजा राशि में लगाई 143 करोड़ रुपए की चपत

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं उच्च मार्ग मंत्रालय के सामने रखा गड़बड़झाला

हिमाचल में फोरलेन जमीन मुआवजा राशि में लगाई 143 करोड़ रुपए की चपत

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हिमाचल में फोरलेन में आने वाली जमीन के मालिकों के लिए केंद्र की ओर से 143 करोड़ की राशि जारी की गई थी। इसके लिए केंद्र सरकार (Central government) ने बाकायदा सभी राज्यों को इस राशि को ढाई फीसदी से अधिक खर्च ना करने की हिदायत थी। मगर इस राशि को नौ प्रतिशत के हिसाब से खर्च किया गया है। इसमें सात फीसदी स्थापना व्यय और दो फीसदी कंटीजेंसी (Contingency) के रूप में खर्च किए गए। काबिलेगौर है कि इसका खामियाजा फोरलेन के उन प्रभावितों को भुगतना पड़ा है जिनकी जमीनें इसके तहत आई हैं। उन्हें सीधा बजट की कमी बताकर केवल आधा-अधूरा मुआवजा ही दिया गया। इस गड़बड़झाले को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं उच्च मार्ग मंत्रालय (Union Ministry of Road Transport and Highways) के सामने रखा गया है। इस गड़बड़झाले को स्वयं फोरलेन प्रभावितों ने ही उजागर किया है। अब आलम यह है कि उच्च अधिकारियों को इस पर जवाब देते नहीं बन रहा है। हिमाचल प्रदेश सहित बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, गुजरात, पश्चिम बंगाल, केरल, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी ऐसा ही गड़बड़झाला सामने आया है।

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हिमाचल में फोरलेन निर्माण में आने वाले जमीन मालिकों (land owners) को मुआवजा दिया जाना था। इसके लिए केंद्र की ओर से 2205.48 करोड़ रुपए जारी किए गए थे। मगर इस राशि में 143 करोड़ रुपए की राशि का गड़बड़झाला हुआ है। यह गड़बड़झाला तीन वित्तीय वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 के बीच किया गया है। तत्कालीन प्रदेश सरकार ने 2205.48 करोड़ रुपए में से प्रशासनिक व्यय 55 करोड़ की जगह 198 करोड़ रुपए कर दिया था।

कौन से वर्ष में कितने मिले पैसेः हिमाचल प्रदेश भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच (State Land Acquisition Affected Forum) के अध्यक्ष ने बीआर कौंडल ने इस संबंध में उजागर किया है कि फोरलेन प्रभावितों को फैक्टर एक तहत मुआवजा देने की बात कही गई थी मगर यह फैक्टर दो के अनुसार ही मिलना है। वहीं वर्ष 2014-15 में प्रदेश को को 12.99 करोड़, 2015-16 में 920.31 करोड़ और 2016-17 में 1272.18 करोड़ रुपए मिले थे।

वहीं इस संबंध में प्रधान सचिव राजस्व ने बताया कि यह मामला लोक निर्माण विभाग का है। इस संबंध में उनसे ही बात की जाए। जब इस संबंध में पीडब्ल्यूडी (PWD) नेशनल हाइवे के मुख्य अभियंता (chief engineer) पीके शर्मा से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उक्त मामला नेशनल र्हावे अथॉरिटी ऑफ इंडिया एनएचएआई से जुड़ा है। उनसे ही बात की जाए। वहीं जब एनएचएआई शिमला के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बेसिल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ढाई प्रतिशत ही दे रहे हैं। इस संबंध में राजस्व विभाग से ही पता करें। इसमें हमारा लेना-देना नहीं है।

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