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यहां 700 पेड़ों पर चलने वाली है कुल्हाड़ी, बचाने को किसी ने बांधी राखी किसी ने बजाई बांसुरी

यहां 700 पेड़ों पर चलने वाली है कुल्हाड़ी, बचाने को किसी ने बांधी राखी किसी ने बजाई बांसुरी

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बालाघाट। जंगल औऱ पेड़ों को बचाने के लिए लोग जगह-जगह मुहिम चला रहे हैं। हरियाली के लिए कई राज्यों की सरकारें भी योजनाएं बना रही हैं लेकिन कहीं-कहीं सरकार पेड़ काटने पर तुली है। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बालाघाट में भी एक सड़क निर्माण के लिए 700 से अधिक पेड़ों को काटे जाने है। इसके विरोध में सैकड़ों की संख्या में लोग पेड़ों को बचाने के कई तरीके अपना रहे हैं। जानकारी के अनुसार बालाघाट स्थित वैनगंगा नदी के किनारे बनने वाली एक सड़क के लिए करीब 700 पेड़ों को काटा जाना है। वहां के लोग इस बात के विरोध में हैं। लोग इनको बचाने के लिए अलग-अलग तरीके से विरोध कर रहे हैं। कुछ लोग पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांध रहे हैं तो कुछ पेड़ों के पास बांसुरी बजा कर विरोध कर रहे हैं, कुछ पेंटिंग के जरिए पेड़ों को न काटने का संदेश दे रहे हैं।

 

छात्राओं ने पेड़ों को राखी बांधकर ली रक्षा की शपथ

कुछ छात्राओं ने यहां पर प्रदर्शन भी किया। एक छात्रा ने कहा कि रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) आने वाला है, मैंने पेड़ों को भी राखी बांधकर इन्हें बचाने की शपथ ली है। जैसे हम भाई को रक्षा के लिए राखी बांधते हैं वैसे ही यह भाव है कि इन पेड़ों को भी नहीं कटने देंगे। बालाघाट के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रमेश रंगलानी का कहना है कि हमारा विरोध सड़क या बाईपास बनाने को लेकर नहीं, हमारा विरोध इन पेड़ों को काटने से है। बालाघाट की 55 संस्थाओं ने मिलकर पेड़ नहीं काटे जाने के लिए आवाज उठाई है। उन्होंने बताया कि हमारा समर्थन पूर्व मंत्री और विधायक गौरीशंकर बिसेन ने भी किया है।


इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि उन्हें 500 से ज्यादा पेड़ काटने की अनुमति दी जा रही है। डीएफओ अनुराग कुमार ने बताया कि हमें पीडब्ल्यूडी (PWD) ने आवेदन दिया था कि उन्हें डेंजर रोड पर सड़क बनानी है जिसके लिए सर्वे कर लगभग 3 हेक्टेयर में लगे पेड़ काटे जाने का निर्णय एक उच्च स्तरीय समिति के द्वारा लिया गया है। फिलहाल सड़क के लिए भले ही यहां पेड़ों को काटने का निर्णय लिया गया है, लेकिन स्थानीय लोग अपने-अपने तरीकों से इन्हें बचाने के लिए लगे हुए हैं। देखना यह होगा कि उनकी ये मुहिम कितनी कामयाब होती है।

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