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हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश: मृकुला देवी मंदिर भवन के जीर्णोद्धार को टीम गठित करे एएसआई

एक सप्ताह में स्थल का निरीक्षण और मरम्मत के एस्टीमेट तैयार करने के दिए आदेश

हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश: मृकुला देवी मंदिर भवन के जीर्णोद्धार को टीम गठित करे एएसआई

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शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट (Himachal High Court) ने उदयपुर में मृकुला देवी मंदिर भवन (Mrikula Devi Temple Building) के जीर्णोद्धार के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) (एएसआई) विभाग को विशेष टीम गठित करने का आदेश दिया है। इस टीम को एक सप्ताह के भीतर स्थल का निरीक्षण करने और मृकुला देवी मंदिर की आवश्यक मरम्मत के लिए एस्टीमेट तैयार करने के आदेश जारी किए है। राज्य में इस मंदिर को अत्यधिक ऐतिहासिक महत्व मिला है।

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कोर्ट ने आगे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मंदिर की मरम्मत, रखरखाव और संरक्षण के लिए धन उपलब्ध कराया जाए और उसके बाद एक महीने के भीतर आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू किया जाए, ताकि इसे तेजी से पूरा किया जा सके। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), कुल्लू द्वारा माता मृकुला देवी मंदिर, उदयपुर, जिला लाहुल एवं स्पीति की जर्जर स्थिति को प्रस्तुत करती रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इस जनहित याचिका पर ये आदेश पारित किए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र अधिवक्ता वंदना मिश्रा ने माता मृकुला देवी मंदिर की कई तस्वीरें प्रस्तुत कीं, जिससे पता चलता है कि मंदिर भवन टूटी -फूटी स्थिति में है। मंदिर की छत अस्थायी रूप से लकड़ी के तख्तों के ऊपर टिकी है। चारों तरफ की दीवारों में दरारें हैं। प्रतिवादी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा मंदिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। एमिकस क्यूरी ने मंदिर के पुजारी के साथ जो बातचीत की, उसके अनुसार अगर तत्काल मरम्मत नहीं की गई तो यह मंदिर कभी भी गिर सकता है। एएसआई की ओर से दायर की गई स्टेटस रिपोर्ट के माध्यम से, अदालत ने एएसआई द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को पूरी तरह से असंतोषजनक पाया और अदालत ने कहा कि जिस गति से प्रतिवादी आगे बढ़ रहे हैं, निश्चित रूप से संरचना के अस्तित्व को खतरे में डाल देगा। मामले को आगामी सुनवाई के लिए 13.05.2022 को निर्धारित किया गया है।

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