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8th Pay Commission: चपरासी से लेकर IAS तक इतनी हो जाएगी सैलरी, यहां पढ़े
8th Pay Commission: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग के तहत अपनी सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं। 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर, 2025 को खत्म हो रहा है। इसलिए सरकार ने पहले ही 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सदस्यों को नियुक्त कर दिया है, और इसके द्वारा सुझाए गए नए सैलरी और पेंशन नियम 1 जनवरी 2026 से लागू किए जा सकते हैं। देश के करीब 1.19 करोड़ परिवारों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार अगले साल क्या फैसला लेती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है, तो महीने के अंत में हाथ में आने वाली रकम कितनी बढ़ जाएगी? वेतन वृद्धि का पूरा खेल ‘फिटमेंट फैक्टर’ पर निर्भर करेगा, अगर प्रस्तावित 2.15 का फॉर्मूला लागू होता है, तो हर स्तर के कर्मचारी की बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। लेवल-1 यानी चपरासी या शुरुआती स्तर के कर्मचारियों की बात करें, तो अभी उनकी बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है. नए आयोग के बाद यह सीधे दोगुने से ज्यादा होकर 38,700 रुपये हो जाएगी।
लेवल के अनुसार सैलरी में होगी बढ़ोतरी
केंद्र सरकार के तहत कर्मचारियों के 18 लेवल हैं। 8वें वेतन आयोग की सैलरी बढ़ोतरी कर्मचारी या पेंशनभोगी के लेवल पर निर्भर करेगी। इन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी हर लेवल पर अलग-अलग होती है।
सरकारी कर्मचारियों के 18 लेवल कौन से हैं?
लेवल 1: एंट्री-लेवल/ग्रुप D कर्मचारी
लेवल 2–9: ग्रुप C कर्मचारी
लेवल 10–12: ग्रुप B कर्मचारी
लेवल 13–18: ग्रुप A कर्मचारी
फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल नया केंद्रीय वेतन आयोग नई बेसिक सैलरी कैलकुलेट करने के लिए करता है। 8वां वेतन आयोग फिटमेंट फैक्टर तय करने के लिए महंगाई समेत कई फैक्टर्स को ध्यान में रखेगा।
7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर इस्तेमाल किया था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी सैलरी में 2.57 गुना बढ़ोतरी हुई थी, क्योंकि इसे सिर्फ बेसिक सैलरी में जोड़ा गया था। मिल जानकारी के अनुसार, एक्सपर्ट तीन संभावित फिटमेंट फैक्टर्स पर चर्चा कर रहे हैं: 1.92 (कंजर्वेटिव), 2.15 (मॉडरेट), और 2.57 (ऑप्टिमिस्टिक)। फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, सैलरी में बढ़ोतरी उतनी ही ज्यादा होगी।
8वें वेतन आयोग के तहत अगर फिटमेंट फैक्टर 1.92 हुआ तो सैलरी में बढ़ोतरी इस तरह होगी:
लेवल 1 — ₹34,560
लेवल 5 — ₹56,064
लेवल 10 — ₹1,07,712
लेवल 15 — ₹3,49,824
लेवल 18 — ₹4,80,000
सैलरी बढ़ने का पूरा दारोमदार इसी फिटमेंट फैक्टर पर है। आसान शब्दों में समझें तो यह एक मल्टीप्लायर (गुणांक) है। आपकी मौजूदा बेसिक सैलरी को इसी नंबर से गुणा करके नई सैलरी तय की जाती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी की बेसिक पे 50,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.15 है, तो 50,000 को 2.15 से गुणा करने पर नई सैलरी 1,07,500 रुपये बनेगी। लेकिन यह फैक्टर हवा में तय नहीं होता। इसके निर्धारण में महंगाई दर , रहन-सहन का खर्च और सरकार के खजाने की स्थिति जैसे कई आर्थिक पहलुओं को देखा जाता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि प्राइवेट सेक्टर की सैलरी और मार्केट बेंचमार्क को भी ध्यान में रखकर ही सरकार अंतिम मुहर लगाती है। जब बेसिक सैलरी में बदलाव होता है, तो इसका असर सिर्फ मूल वेतन तक सीमित नहीं रहता. महंगाई भत्ता), हाउस रेंट अलाउंस और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन भी इसी बेसिक सैलरी पर कैलकुलेट होती है। यानी अगर 2.15 का फैक्टर मंजूर हुआ, तो यह कर्मचारियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी सौगातों में से एक साबित हो सकती है।
पंकज शर्मा
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