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#J&K में आतंकी घटनाओं से ज्यादा #सड़क_हादसों में गई लोगों की जान

घाटी में इस साल 126 आतंकी मारे, 75 जवान शहीद

#J&K में आतंकी घटनाओं से ज्यादा #सड़क_हादसों में गई लोगों की जान

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जम्मू। जेएंडके (Jammu-kashmir) में आतंकी हमलों से ज्यादा सडक हादसों में लोगों की जान जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार सड़क हादसों के मामले में जम्मू-कश्मीर भारत में दूसरे स्थान पर है। पिछले साल 2019 में यहां 485 के करीब हादसे हुए थे, इनमें 3838 लोग घायल हुए थे। 2018 में 5,978 सड़क दुर्घटनाओं में 984 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2017 में 5,624 सड़क दुर्घटनाओं में 926 और 2016 में 5,501 हादसों में 688 लोगों की जानें गई थी। वहीं, आतंकी वारदात (Terrorist Act) की बात करें तो इस साल जनवरी से 15 जुलाई तक घाटी में कुल 188 आतंकवाद से जुड़ी घटनाएं हुई हैं। इस अवधि में 2019 में 126 आतंकी मारे गए, जबकि इस साल इसी अवधि में 136 आतंकियों का खात्मा हुआ।


पिछले साल 51 ग्रेनेड हमले हुए वहीं इस साल 15 जुलाई तक 21 ग्रेनेड हमले (Grenade attack) हुए हैं। पिछले साल आतंकी हमलों में 23 आम नागरिक मारे गए थे, वहीं 75 सुरक्षबलों के जवान शहीद हुए, वहीं इस साल 22 आम नागरिक मारे गए और 35 जवान शहीद हुए हैं। अगर पिछले 5 वर्षों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर में हर साल 900 से अधिक लोग सड़कों का शिकार हो जाते हैं। जम्मू-कश्मीर ट्रैफिक विभाग के आंकड़े भी यही बताते हैं। पिछले नौ सालों में प्रदेश में 56,000 सड़क दुर्घटनाओं में 9,000 से अधिक लोगों की मौत हुई यही नहीं इन सड़क हादसों में लगभग 8,000 लोग घायल हुए। पिछले छह महीनों की बात करें तो विभिन्न सड़क हादसों में 150 लोगों की जान चली गई। जून में ही मरने वालों की संख्या 40 के करीब थी।

3600 से ज्यादा बार एलओसी पर सीजफायर का उल्लंघन

जेएंडएके में अनुच्छेद 370 हटने के बाद सुरक्षाबलों द्वारा आतंकियों के खिलाफ छेड़े गए अभियान के बाद अब तक 19 से अधिक लोग आतंकी हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, आतंकी हमलों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर में हर साल डेढ़ से दो दर्जन लोग इन हादसों का शिकार हो जाते हैं। मार्च 2020 तक आतंकी हमलों में 23 लोगों ने अपनी जान गंवाई। 2019 में भी मरने वालों का आंकड़ा इसी के आसपास था। वहीं, पाक नियंत्रण रेखा पर 3600 से अधिक बार सीजफायर का उल्लंघन भी कर चुका है।

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