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स्वां में अवैध खनन की जांच के लिए ऊना पहुंचा एनजीटी का पैनल

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में चल रही जांच

स्वां में अवैध खनन की जांच के लिए ऊना पहुंचा एनजीटी का पैनल

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ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला की स्वां नदी( Swan river) में अवैध खनन की शिकायत की जांच करने के लिए एनजीटी का पैनल (NGT Panel) आज यहां पहुंचा। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एनजीटी का यह पैनल नदी में हो रहे अवैध खनन ( Illegal mining) की जांच कर रहा है। इस दौरान खनन विभाग ( mining department) के सभी अधिकारी मौजूद है। एनजीटी के इस पैनल की अध्यक्षता पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस जसबीर सिंह कर रहे हैं। इस पैनल में पर्यावरण व खनन विशेषज्ञों को सामिल किया गया है। जांच के बाद यह पैनल अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगा

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जिला में अवैध खनन के मामले समय -समय पर सामने आते रहे हैं। कई बार विभाग व पुलिस ( Police)ने कार्रवाई भी की। आरोप यह भी लगाया जाता है कि पड़ोसी राज्यों से खनन माफिया यहां पर अवैध खनन को अंजाम देता रहा है। ऐसे में अब एनजीटी के पास मामला पहुंचा तो आज ऊना पहुंचा पैनल सारे मामले की रिपोर्ट बना कर एनजीटी को सौंपेगा।


एनजीटी के पैनल के सदस्य

इस पैनल में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड , पर्यावरण , वन एवं जलवायू परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालयों, केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान संस्थान, देहरादून , हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला के प्रतिनिधि समिति के सदस्य बनाए गए हैं। पर्यावरण, वन जलवायू परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी ( चंडीगढ़) उसके नोडल एजेंसी होंगे।

अमनदीप की याचिका  पर किया पैनल का गठन 
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की तीन सदस्यीय पीठ ने अमनदीप की याचिका पर सुनवाई करते हुए 2 मार्च के इस समिति का गठन किया था। अमनदीप ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि खनन लाइसेंस की आड़ में बालू माफिया अवैज्ञानिक ढंग से स्वां नदी से बालू व अन्य सामग्री उठाकर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
इस मौके पर शिकायतकर्ता अमनदीप ने कहा कि और अवैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे अवैध खनन से प्राकृतिक संपदाओं को व्यापक नुकसान पहुंच रहा है। इतना ही नहीं इसके कारण सोमभद्रा नदी पर करोड़ों पर खर्च कर लगाए तट बांधों नुकसान हो रहा है, वहीं स्वां नदी के किनारे कृषि कारोबार के लिए लगाए गए नलकूपों पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। अमनदीप सिंह ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को शिकायत सौंपी थी। जिसकी जांच के लिए एनजीटी पैनल जिला में पहुंचा है। पैनल को वह सभी साइट्स दिखाई गई है जहां से अवैध खनन कर स्वां नदी को नुकसान पहुंचाया गया है।


अवैध खनन का सर्वे करा कर विस्तृत रिपोर्ट भी भेजी जाए

जस्टिस जसबीर सिंह ने कहा कि बिना लाइसेंस के पूरे जिला में हुए अवैध खनन का सर्वे करा कर विस्तृत रिपोर्ट भी भेजी जाए। अवैध खनन को रोकने के लिए एनजीटी पैनल कुछ सिफारिशें भी करेगा। खनन के लिए पट्टे पर दी जानी वाली जगह की जियो फैंसिंग कराने, रेत-बजरी की ढुलाई में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों पर जीपीएस उपकरण लगाने तथा एक कंट्रोल रूम स्थापित करने पर भी विचार किया जाएगा। कंट्रोल रूम अवैध खनन से जुड़ी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करेगा।एनजीटी पैनल ने लीज अवधि को 5 वर्ष से घटाकर 2 वर्ष करने बात भी कही तथा दो वर्ष की अवधि के बाद अगले 1 साल तक उस क्षेत्र को लीज पर न देने की सिफारिश भी की जा सकती है। इसके अलावा अगर लीज की वर्तमान अवधि 5 वर्ष ही रहती हो, तो अगले 2 वर्ष तक उस क्षेत्र को लीज पर नहीं दिया जा सकेगा। लीज एरिया में नियमानुसार खनन हो, इसके लिए स्वां नदी की सतह पर पक्के निशान बनाने की भी सिफारिश की जा सकती है, ताकि पता लगाया जा सके कि कितना रेत खड्ड में आया और कितना निकाला गया।
इसके बाद अप्पर बसाल में एक क्रशर का निरीक्षण करने के बाद एनजीटी पैनल के अध्यक्ष जस्टिस जसबीर सिंह ने कहा कि प्रत्येक क्रशर पर काम करने वाले मजदूरों का रिकॉर्ड होना चाहिए। रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए कि कितने मजदूर काम करते हैं, उन्हें कितनी मजदूरी दी गई। साथ ही क्रशर मालिक वायु प्रदूषण को रोकने के लिए भी कार्य करना सुनिश्चित करें, ताकि आस-पड़ोस में खेती योग्य भूमि को कोई नुकसान न हो और किसानों को असुविधा का सामना न करना पड़े। पैनल आगे की कार्रवाई के लिए सिफारिशों सहित अपनी विस्तृत रिपोर्ट एनजीटी को देगा।

 

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