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मकर संक्राति पर यहां डुबकी लगाने पर मिलता है 100 अश्वमेध यज्ञों का फल

पश्चिम बंगाल में लगाता है सबसे बड़ा मेला, गंगासागर में स्नान करने का अपना ही अलग महत्त्व

मकर संक्राति पर यहां डुबकी लगाने पर मिलता है 100 अश्वमेध यज्ञों का फल

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14 जनवरी को मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन हरिद्वार (Haridwar) सहित कई पवित्र स्थलों पर लोग डुबकी लगाते है। मकर संक्रांति के दिन ही भारतीय देशी कलेंडर शुरू होता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा सागर (Gangasagar) में जो स्नान और दान का महत्व है, वह श्रद्धालु को कहीं दूसरी जगह नहीं मिलता है। यही कारण है कि पश्चिम बंगाल (West Bengal) के इस सबसे बड़े मेले में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

सारे तीरथ बार-बार गंगा सागर एक बार

गंगा सागर की तीर्थ यात्रा के बारे में कहा जाता है कि श्सारे तीरथ बार-बार गंगा सागर एक बार इस कहावत के पीछे मान्यता यह है कि जो पुण्यफल की प्राप्ति किसी श्रद्धालु (Devotees) को सभी तीर्थों की यात्रा और वहां पर जप-तप आदि करने पर मिलता है, वह उसे गंगा सागर की तीर्थयात्रा में एक बार में ही प्राप्त हो जाता है। गंगासागर मेला पश्चिम बंगाल में कोलकाता (Kolkata) के निकट हुगली नदी के तट पर ठीक उसी स्थान पर किया जाता हैए जहां पर गंगा नदी बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में जाकर मिलती है। सरल शब्दों में कहें तो जहां पर गंगा और सागर का मिलन होता हैए उसे गंगासागर कहते हैं।

गंगासागर मेला 16 जनवरी तक चलेगा

मकर संक्रांति के दिन यहां पर स्नान और दान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन इस पावन स्थान पर स्नान करने पर 100 अश्वमेध यज्ञ (100 Ashwamedha Yagya) करने का पुण्य फल प्राप्त होता है। मकर संक्रांति के दिन गंगा सागर में स्नान के पुण्यफल के पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसके अनुसार मान्यता यह है कि जिस दिन गंगा शिव की जटा से निकलकर पृथ्वी पर बहते हुए ऋषि कपिल मुनि के आश्रम में पहुंची थी, वह मकर संक्रांति का ही दिन था। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा कपिल मुनि के श्राप के कारण मृत्यु को प्राप्त हुए राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को सद्गति प्रदान करके सागर मिल गई।

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यह पौराणिक कथा

गंगा सागर में कपिल मुनि का प्रसिद्ध मंदिर भी हैए जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। मान्यता है कि यह कपिल मुनि के प्राचीन आश्रम स्थल पर बना हुआ है। मान्यता है कि कपिल मुनि के समय राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ ​करके यज्ञ के अश्वों को स्वतंत्र छोड़ दिया। ये अश्व जिस राज्य से जाते, वहां के राजा या व्यक्ति विशेष को राजा की अधीनता स्वीकार करनी पड़ती है। उस अश्व की रक्षा के लिए राजा सगर ने अपने 60 हजार पुत्रों को भी भेजा था। एक दिन अश्व अचानक से गायब हो गया और बाद में कपिल मुनि के आश्रम में जाकर मिला। जहां पर राजा के पुत्रों ने जाकर कपिल मुनि को अपशब्द कहना शुरू किया। इससे नाराज होकर कपिल मुनि ने अपने नेत्रों के तेज से उन सभी 60 हजार पुत्रों को भस्म कर दिया।

ऐसे आई थी गंगा धरती पर

मान्यता है कि कपिल मुनि के श्राप के कारण उन्हें जब वर्षों तक मुक्ति नहीं मिली तो राजा सगर के पौत्र भगीरथ ने कपिल मुनि के आश्रम में जाकर माफी मांगी और अपने पुरखों की मुक्ति का उपाय पूछा। तब कपिल मुनि ने उन्हें गंगा जल से मुक्ति पाने का उपाय बताया। जिसके बाद राजा भगीरथ ने कठिन तप करके गंगा को पृथ्वी पर लेकर आए। गंगा सागर में स्नान करने के बाद श्रद्धालु भगवान सूर्य को अर्ध्य देते हैंण् इस दिन गंगा और सागर के संगम में भक्तगण समुद्र देवता को नारियल और यज्ञोपवीत भेंट करते हैंण् मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन यहां पर स्नान करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और श्रद्धालु को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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