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रुद्राक्ष धारण करना नहीं आसान काम, इन नियमों का करना पड़ता है पालन

रुद्ररूप है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष, धारण करने से इंसान को हर क्षेत्र में मिलती है सफलता

रुद्राक्ष धारण करना नहीं आसान काम, इन नियमों का करना पड़ता है पालन

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दुनिया में कई ऐसी चीजें हैं जिनको देवी-देवताओं से जोड़ा जाता है। फिर चाहे वो चीज कोई फल-सब्जी हो, मोती हो या रुद्राक्ष हो। रुद्राक्ष के विभिन्न दानों का संबंध अलग-अलग देवी-देवताओं और मनोकामनाओं से है। भगवान शिव को रुद्राक्ष बहुत प्रिय है इसलिए उनके भक्त हमेशा अपने शरीर में रुद्राक्ष (rudraksha) को धारण करते हैं। रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर ग्यारह मुखी तक होते हैं और इन सभी रुद्राक्ष को धारण करने की अपनी-अपनी मान्यता होती है।

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कहा जाता है कि रुद्राक्ष पहनने से स्मरण शक्ति मजबूत होती है। चमत्कारी बीज रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओं से बना है। एक मुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव का साक्षात रूप माना जाता है। मान्यता है कि एक मुखी रुद्राक्ष भोग और मोक्ष प्रदान करता है। वहीं, दो मुखी रुद्राक्ष देव-देवेश्वर माना जाता है। कहा जाता है कि दो मुख वाला रुद्राक्ष सभी मनोकामनाएं पूरी करता है। जबकि तीन मुखी रुद्राक्ष से समस्त विद्याएं प्राप्त होती हैं। चार मुख वाले रुद्राक्ष को मोक्ष दिलाने वाला अमृत बीज कहा जाता है। चार मुखी वाला रुद्राक्ष साक्षात् ब्रह्मा जी का स्वरूप है। इस रुद्राक्ष के दर्शन से धर्म, अर्थ, मोक्ष और काम की प्राप्ति होती है। इसके अलावा पांच मुखी रुद्राक्ष कालाग्नि रूद्र का स्वरूप है। पांच मुखी रुद्राक्ष को सभी प्रकार का सामथ्र्य प्रदान करने वाला रुद्राक्ष माना जाता है। यह रुद्राक्ष मोक्ष दिलवाने के लिए जाना जाता है। छ: मुखी रुद्राक्ष कार्तिकेय का स्वरूप है, जिसे धारण करने व्यक्ति ब्रह्महत्या के पाप से भी मुक्त हो जाता है। वहीं, सात मुखी रुद्राक्ष भिखारी को भी राजा बना देता है। आठ मुखी रुद्राक्ष को भैरव का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि यह रुद्राक्ष इंसान को पूर्णायु प्रदान करता है। इसके अलावा नौ मुखी रुद्राक्ष कपिल-मुनि का स्वरूप माना जाता है और दस मुखी रुद्राक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। वहीं, ग्यारह मुखी रुद्राक्ष रुद्ररूप है और मान्यता है कि इसे धारण करने से इंसान को हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।

ऐसे धारण करें रुद्राक्ष

रुद्राक्ष को हमेशा लाल, पीले या सफेद धागे में धारण करें। इसके अलावा रुद्राक्ष को सोने, चांदी और तांबे में भी धारण किया जा सकता है। रुद्राक्ष को हमेशा विषम संख्या में धारण करें। कभी भी 27 दानों से कम की रुद्राक्ष माला न बनवाएं। मान्यता है कि ऐसा करने पर शिवदोष लगता है। रुद्राक्ष धारण करते समय ॐ नम: शिवाय का जाप जरुर करें। रुद्राक्ष को कभी काले दागे में और अपवित्र होकर धारण न करें। इसके अलावा कभी किसी दूसरे व्यक्ति को अपना रुद्राक्ष धारण करने के लिए न दें। मान्यता है कि रुद्राक्ष की 108 दानों की माला को धारण करने और जप करने से मनुष्य को विशेष कृपा हासिल होती है।

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