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कांगड़ा की 32 परियोजनाओं पर Environmental Clearance ना मिल पाने का ग्रहण, CUHP भी इसी का हिस्सा

12 साल बाद प्रदेश सरकार ने दो सितंबर को वनभूमि को सीयूएचपी के नाम हस्तांतरण के लिए लिखा

कांगड़ा की 32 परियोजनाओं पर Environmental Clearance ना मिल पाने का ग्रहण, CUHP भी इसी का हिस्सा

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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में 32 से अधिक बड़ी परियोजनाएं पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) के लिए अटकी (Stuck) हुई हैं। इन परियोजनाओं में सेंट्रल यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश ( Central University of Himachal Pradesh ) के निर्माण सहित जिले की प्रमुख सड़क परियोजनाएं और विभिन्न सरकारी भवनों का निर्माण शामिल हैं। प्रदेश में पांच चुनाव, जिसमें विधानसभा व लोकसभा के चुनाव शामिल हैं जो सेंट्रल यूनिवर्सिटी निर्माण के नाम पर लड़े गए। 12 साल बाद अब प्रदेश सरकार ने दो सितंबर को वनभूमि को सीयूएचपी के नाम हस्तांतरण के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा है। सीयूएचपी (CUHP) निर्माण के लिए धर्मशाला के समीप जदरांगल में लगभग 600 एकड़ वनभूमि को सीयूएचपी के नाम से हस्तांतरण किया जाना है, जहां सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मुख्य परिसर का निर्माण प्रस्तावित है। वन भूमि के हस्तांतरण का मामला पिछले कई वर्षों से प्रदेश के वन अधिकारियों के पास है। धर्मशाला के समीप जदरांगल में लगभग 650 एकड़ भूमि चिह्नित की गई हैए लेकिन संस्थान के नाम पर केवल 50 एकड़ स्थानान्तरण किया गया है। शेष वन भूमि को अभी तक केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मंजूरी नहीं मिली है। धर्मशाला और देहरा में सीयूएचपी कैंपस के निर्माण पर लगभग 400 करोड़ रुपए का निवेश किया जाना था लेकिन जदरांगल की भूमि की वन मंजूरी ना मिलने के कारण यह अटका हुआ है। इसके अतिरिक्त जिला कांगड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में कई सड़कों के निर्माण में वन मंजूरी ना मिलने के कारण अधर में लटके पड़े हैं।



 

20 जनवरी 2009 को मिली थी स्वीकृति, भवन निर्माण के लिए स्वीकृत हैं 400 करोड़

सेंट्रल यूनिवर्सिटी का 70 फीसदी निर्माण देहरा में तो 30 फीसदी निर्माण धर्मशाला में होगा। सेंट्रल यूनिवर्सिटी का मुख्यालय धर्मशाला (Dharmshala) में होगा। सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दो परिसर देहरा (Dehra) और धर्मशाला में होंगे। दोनों स्थान हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला में स्थित हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी निर्माण की स्वीकृति 20 जनवरी 2009 को मिली थी तथा इसके प्रस्तावित भवन निर्माण के लिए 400 करोड़ रुपए की राशि भी आबंटित की गई लेकिन इसका निर्माण केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय मंजूरी के चलते फंस कर रह गया है। वर्ष 2009-10 केंद्र में यूपीए की सरकार थी उस समय केंद्रीय भूमि चयन समिति ने जिला कांगड़ा (Kangra) का विस्तृत दौरा किया था। बैजनाथ से इंदौरा तक और धर्मशाला से लेकर कलोहा तक चयन समिति ने भूमि का निरीक्षण कर रिपोर्ट सब्मिट की थी। जिसमें तत्कालीन केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया था कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी का 70 फीसदी निर्माण देहरा में ब्यास कैंपस 30 फीसदी निर्माण धर्मशाला में धौलाधार कैंपस के रूप में किया जाएगा।

यह है केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजे मामले की स्थिति

– सेंट्रल यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में नार्थ कैंपस निर्माण के लिए 75.3931 हेक्टर वन भूमि को हस्तांतरण करने के लिए 7 अगस्त 2019 को ऑनलाइन आवेदन किया गया।
-21 सितंबर 2019 को वन डिवीज़न धर्मशाला से मामला सर्किल कार्यालय को भेजा गया।
– सर्किल कार्यालय से 8 मार्च 2020 को हिमाचल प्रदेश नोडल कार्यालय को भेजा गया।
– नोडल कार्यालय से 31 जुलाई 2020 प्रदेश सरकार को प्रेषित किया गया।
-प्रदेश सरकार ने 22 अगस्त को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा जो 2 सितंबर को प्राप्त हुआ है।

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