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जो लोग पहले कहते थे “स्टेट हुड मारो ठूड”, आज RDG का कर रहे विरोध
Deputy CM Mukesh Agnihotri: हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन RDG पर तीखी बहस देखने को मिली। सदन के बाहर डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने बीजेपी को घेरते हुए उनका स्पष्ट रुख पूछा है। डिप्टी CM ने भारत के संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता के साथ राज्यों को अधिकार दिए है। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि RDG केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि हिमाचल और हिमाचलियत का प्रश्न है, जो लोग पहले “स्टेट हुड मारो ठूड” जैसे नारे लगाते थे, वही आज RDG का विरोध कर रहे हैं
राज्यों को कमजोर करने की कोशिश
अग्निहोत्री ने कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि कंसोलिडेटेड फंड से धन का बंटवारा किस प्रकार होगा। देश के नेताओं ने उसी समय इन प्रश्नों का समाधान कर दिया था। हिमाचल प्रदेश के निर्माण के समय यह स्पष्ट था कि इस पर्वतीय राज्य को केंद्र सहायता करेगा। रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से जोड़ा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों से राज्यों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और सवाल उठाया कि यदि राज्यों को सशक्त नहीं करना था तो उनका गठन ही क्यों किया गया।
जीएसटी व्यवस्था से बड़े राज्यों को लाभ
मुकेश ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था से बड़े राज्यों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ हुआ, जबकि हिमाचल जैसे छोटे और विशेष श्रेणी के राज्य को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। पहले जीएसटी कंपनसेशन बंद किया गया और अब RDG को भी समाप्त करने की बात हो रही है, जो हिमाचल के लिए गंभीर विषय है। 17 में से 12 राज्यों में RDG पर निर्भरता केवल 1 प्रतिशत के आसपास है, ऐसे राज्यों को इसकी विशेष आवश्यकता नहीं है, लेकिन हिमाचल के लिए यह अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि नागालैंड की RDG पर निर्भरता 17 प्रतिशत और हिमाचल की 13 प्रतिशत है, जबकि कर्नाटक की निर्भरता मात्र 1 प्रतिशत है। पूर्व सीएम जयराम सरकार को 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी कंपनसेशन और 54 हजार करोड़ रुपये RDG के माध्यम से प्राप्त हुए थे। RDG बंद होने के संदर्भ में जयराम ठाकुर के चुनाव के लिए तैयार रहने वाले बयान का भी उल्लेख किया गया। सीएम का स्पष्ट संदेश था कि RDG हिमाचल की आवश्यकता है और इसे बंद करना, प्रदेश के साथ फरेब के समान होगा
संजू चौधरी
