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नूरपुर की सियासत में ‘आर-पार’: बीजेपी के भीतर जंग, कांग्रेस मौन और चौथे मोर्चे ने बढ़ाई सरगर्मी
Himachal News: कांगड़ा जिला के नूरपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति इन दिनों एक नए और दिलचस्प दौर में प्रवेश कर चुकी है। लंबे समय से अंदरखाने सुलग रही राजनीतिक चिंगारी अब सोशल मीडिया पर ‘आर-पार’ की जंग में तब्दील हो गई है। नूरपुर का सियासी पारा लगातार चढ़ रहा है और आने वाले दिनों में इसके और अधिक गर्माने के साफ संकेत मिल रहे हैं।
बीजेपी में गुटबाजी: निक्का बनाम पठानिया
नूरपुर में सबसे ज्यादा सियासी हलचल बीजेपी के भीतर मची हुई है। स्थानीय विधायक रणवीर सिंह निक्का और पूर्व मंत्री राकेश पठानिया के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जो लड़ाई अब तक पर्दे के पीछे लड़ी जा रही थी, वह अब पूरी तरह से सार्वजनिक मंचों पर आ चुकी है। दोनों गुट एक-दूसरे पर लगातार निशाना साध रहे हैं, जिससे क्षेत्र का माहौल पूरी तरह से चुनावी रंग में रंगा नजर आ रहा है।
विकास कार्यों पर दावों की होड़
एक ओर जहां विधायक रणवीर सिंह निक्का जनता से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं और व्यक्तिगत स्तर पर जनसमस्याओं के समाधान व नए विकास कार्यों के जरिए जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। वहीं, दूसरी ओर पूर्व मंत्री राकेश पठानिया आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। वे नूरपुर में ठप पड़े विकास कार्यों को बड़ा मुद्दा बनाकर विधायक पर लगातार हमलावर हैं। साथ ही, पठानिया अपने मंत्री कार्यकाल के दौरान हुए कामों की याद जनता को दिलाकर अपना राजनीतिक आधार एक बार फिर से मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
कांग्रेस की खामोशी से उठते सवाल
इस पूरी सियासी उठापटक के बीच क्षेत्र के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की चुप्पी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पार्टी पिछली चुनावी हार के सदमे से अब तक उबर नहीं पाई है। नूरपुर के ज्वलंत और प्रमुख मुद्दों पर कांग्रेस का यह मौन राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर रहा है।
‘चौथे मोर्चे’ के रूप में नए चेहरे की दस्तक
सियासत के इस खालीपन के बीच नूरपुर की राजनीति में एक नया ट्विस्ट भी आ गया है। एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी लगातार अपने बेबाक बयानों के जरिए भाजपा और कांग्रेस, दोनों के स्थापित नेताओं की कार्यप्रणाली की बखिया उधेड़ रहे हैं। सोशल मीडिया का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए वे खुद को एक सशक्त और वैकल्पिक राजनीतिक चेहरे (चौथे मोर्चे) के रूप में स्थापित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का मानना है कि नूरपुर में जिस तेजी से राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं, उससे यह विधानसभा क्षेत्र जल्द ही पूरे हिमाचल प्रदेश की सियासत का हॉटस्पॉट बन सकता है। हालांकि, अंततः नूरपुर की सियासत किस करवट बैठेगी और जनता किस पर अपना भरोसा जताएगी, इसका फैसला आने वाला वक्त ही करेगा।
ऋषि महाजन
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