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यहां Flyover slab के नीचे लगती है क्लास, 200 बच्चों को Free में पढ़ाता है ये युवक

यहां Flyover slab के नीचे लगती है क्लास, 200 बच्चों को Free में पढ़ाता है ये युवक

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नई दिल्ली। शिक्षा हर बच्चे का हक होता है और इसके लिए उसे सही वातावरण भी चाहिए होता है। कई जगह बच्चे शायद इसके महत्व को समझ भी नहीं पाते और न ही उनके माता-पिता इस हाल में होते हैं उन्हें समझा सकें या प्रोत्साहित कर सकें। ऐसी ही एक जगह है पूर्वी दिल्ली (East delhi) के यमुना खादर का झुग्गी कैंप। ये उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से रोज़गार की तलाश में आने वाले बहुत से लोगों का घर है। इन झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग या तो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं या फिर आस-पास खाली पड़ी ज़मीन पर सब्ज़ियां उगाते हैं और इन्हें बेचकर अपना गुज़ारा करते हैं।

यहां के बच्चों का सरकारी स्कूलों (Government schools) में नाम तो लिखा गया है पर वे स्कूल जाते नहीं। इन बच्चों के माता-पिता के पास भी इतना समय नहीं है कि वे इनकी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। ऐसे में सत्येन्द्र पाल नाम का एक युवक एक फ्लाईओवर स्लैब (Flyover slab) के नीचे इन बच्चों को पढ़ाता है। झुग्गी कैंप में ही रहने वाला 23 वर्षीय सत्येन्द्र बीएससी फाइनल ईयर में है और अपनी पढ़ाई के साथ-साथ दसवीं कक्षा तक के लगभग 200 बच्चों को पढ़ाता है। सत्येन्द्र साल 2015 से इन बच्चों को पढ़ा रहा है। सिर्फ़ पांच बच्चों के साथ उसने शुरुआत की थी और आज उसके पास 200 बच्चे पढ़ने आते हैं। उसके साथ इन चार साल में दो और साथी, पन्नालाल और कंचन भी जुड़े हैं, वे भी इन बच्चों को पढ़ाते हैं।

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सत्येन्द्र उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के रहने वाला है और 2010 में बेहतर ज़िंदगी की तलाश में अपने परिवार के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गए था। उसका परिवार खेती-बाड़ी से जुड़ा हुआ है। यूपी बोर्ड से बारहवीं की परीक्षा पास करने वाले सत्येन्द्र को परिवार की आर्थिक तंगी और फिर पलायन की वजह से दो-तीन साल के लिए बीच में पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी। शिक्षा को ही सब-कुछ मानने वाले सत्येन्द्र ने हार नहीं मानी और फिर दिल्ली आकर उन्हें जैसे ही मौका मिला, आगरा यूनिवर्सिटी में डिस्टेंस से ग्रेजुएशन में दाखिला ले लिया।

उन्होंने अपनी इस पहल को ‘पंचशील शिक्षण संस्थान’ नाम दिया है। उनका यह संस्थान अभी तक पंजीकृत नहीं है लेकिन फ़िलहाल उनका उद्देश्य सिर्फ़ इतना है कि यहां पर बच्चों की क्लास इसी तरह चलती रहे। बच्चों को पढ़ाने के एवज में सत्येन्द्र किसी भी माता-पिता से कोई फीस नहीं लेता। वह सुबह 5 से 11 बजे तक पहली से लेकर पांचवीं कक्षा और दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक छठी से दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाता है।

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