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पिता के बाद अब बेटे स्वांते पाबो को मिला नोबेल प्राइज, जानिए कौन है यह महान सांइटिस्ट

फिजियोलॉजी-मेडिसिन में रिसर्च के लिए स्वीडन के वैज्ञानिक को पुरस्कार के लिए चुना

पिता के बाद अब बेटे स्वांते पाबो को मिला नोबेल प्राइज, जानिए कौन है यह महान सांइटिस्ट

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स्वीडन के महान साइंटिस्ट स्वांते पाबो (Svante Pabo) को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह प्राइज उन्हें फिजियोलॉजी मेडिसिन (Physiology Medicine) के लिए मिला है। आपको हैरानी होगी यह प्राइज (Prise) पहले पिता को मिला था और अब बेटे को मिल गया है। अब आपके जेहन में सवाल होगा कि यह स्वांते पाबो आखिर हैं कौन तो आइए आज हम इस महान साइंटिस्ट (Great Scientist) के बारे में आपको बताते हैं। नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत हो चुकी है। इसी के तहत सोमवार को फिजियोलॉजी-मेडिसिन के लिए नोबेल प्राइज की घोषणा की गई। इस बार यह प्राइज स्वीडन के के साइंटिस्ट स्वांते पाबो को मिला है। उन्हें यह प्राइज इसलिए मिला है क्योंकि उन्होंने मानव विकास के लिए जिनोम को लेकर एक महान खोज की थी। वहीं डीएनए को लेकर की जा रही खोज के लिए भी स्वांते पाबो एक चर्चित नाम है। अब नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) के नाम के ऐलान के बाद वे बेहद सुर्खियों में आ गए हैं।

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स्वांते पाबो ने विलुप्त होमिनिन और मानव विकास के जीनोम (Human Evolutionary Genome) से संबंधित खोज की है। यही कारण रहा कि उन्हें इस पुरस्कार के लिए सम्मानित किया गया है। इस खोज में स्वांते पाबो ने पाया कि जीन का स्थानांतरण होमो सेपियन्स में हुआ था। जीन का यह प्राचीन प्रवाह मनुष्य के जीवन के लिए बहुत ही प्रासंगिक है। यह ठीक उसी प्रकार से काम करता है जिस प्रकार से हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम (Immune System) किसी भी इंफेक्शन को लेकर प्रतिक्रिया करता है। इसके अतिरिक्त ही उन्होंने डेनिसोवा (Denisova) नाम के एक विलुप्त होमिनिन की खोज भी की थी। यह पूरी तरह से एक छोटी अंगुली की हड्डी के नमूने से प्राप्त जीनोम डेटा से हासिल हुई थी।

स्वांते पाबो स्वीडन के स्टॉकहोम में रहते हैं। आपको जानकर अचरज होगा कि उनके पिता भी बायोकेमिस्ट थे। उनके पिता Sune Bergström को भी वर्ष 1982 में नोबेल पुरस्कार (साझा) मिला था। स्वांते पाबो ने वर्ष 1986 में उपसला यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी। उन्होंने पीएचडी करते वक्त यह खोज की थी कि एडेनोवायरस का ई-19 प्रोटीन इम्यून सिस्टम को कैसे कंट्रोल करता है। इसके साथ ही उन्होंने डीएनए को लेकर भी काफी काम किया है। उन्हें पाला जेनेटिक्स के नाम से जाना जाता है। इसका अर्थ यह है कि डीएनए हमारी उत्पत्ति, पृथ्वि पर जीवों की उत्पत्ति आदि को लेकर खोज करते हैं। वहीं वर्ष 2008 में उनकी शादी लिंडा विजिलैंट से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। नोबेल पुरस्कार से पहले भी उन्हें कई प्रकार के अवार्ड मिल चुके हैं। 67 वर्ष के स्वांते पाबो ने अपनी रिसर्च का एक अनोखा संसाधन कायम किया है। वैज्ञानिक समुदाय (Scientific Community) की ओर से इसका इस्तेमान बड़े पैमाने पर किया जाता है। मंगलवार को भौतिकी विज्ञान बुधवार को रसायन विज्ञान और गुरुवार को साहित्य के क्षेत्र में इन पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी। इस वर्ष 2022 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में पुरस्कार की घोषणा 10 अक्टूबर को की जाएगी।

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