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राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष के बहाने चंद्रेश कुमारी ने दिए बड़े संकेत, राजनीतिक हलचल बढ़ी

सेंट्रल यूनिवर्सिटी पर का श्रेय अपने खाते में डाला

राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष के बहाने चंद्रेश कुमारी ने दिए बड़े संकेत, राजनीतिक हलचल बढ़ी

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धर्मशाला। पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस की वरिष्ठ नेता चंद्रेश कुमारी ने आज अपने राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं। धर्मशाला में मीडिया बातचीत को दौरान अपनी राजनीतिक जीवन की उपलब्धियों के बहाने कांग्रेस की इस 78 वर्षीय नेता ने आने वाले समय के लिए भी कई संकेत दिए। चंद्रेश कुमारी भले ही पिछले कुछ समय से धर्मशाला की राजनीति से दूर रही लेकिन आज एकाएक राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष पूरे करने के बहाने मीडिया के सामने आने से धर्मशाला की राजनीति में हलचल जरूर हुई है। धर्मशाला से चुनाव लड़ने के सपने देखने वालों के लिए चंद्रेश का राजनीति में सक्रिय होना या फिर हाईकमान के आदेशों का पालन करने की बात कहने के मायने बहुत बड़े है। इन सबका असर आने वाले समय में जरूर दिखाई देगा और उनकी बेचैनी भी बढ़ेगी। क्योंकि चंद्रेश धर्मशाला को अपनी कर्मभूमि बता कर चुनावों में उतरने का संकेत तो दे ही चुकी है। सबसे बड़ी बात जिस सेंट्रल यूनिवर्सिटी पर आज तक राजनीति होती रही है, उसका श्रेय सीधे- सीधे चंद्रेश कुमारी ने अपने खाते में ले लिया है।

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धर्मशाला को बताया कर्मभूमि

बकौल चंद्रेश प्रदेश और कांगड़ा की जनता ने उन्हें भरपूर प्यार दिया है।

वह कभी भी सक्रिय राजनीति से पीछे नहीं हटी। वह कांग्रेस को मजबूत करने में अपना योगदान देती रहेगी। वह कांग्रेस की मजबूत सिपाही हैं और उस समय पार्टी का आदेश था कि वो जोधपुर से चुनाव लड़े तो उन्होंने वहां से चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि प्रदेश जनता की सेवा के लिए हमेशा ही अग्रसर रही हैं । 2022 के चुनावों को लेकर चंद्रेश कुमारी ने कहा कि धर्मशाला मेरी कर्मभूमि हैं और जनता की सेवा मरते दम तक करती रहूंगी। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में जो भी आदेश होगा वो पूरा करेगी। सोनिया गांधी से मिलकर कहूंगी कि हिमाचल में सबको मिलकर काम करेंगे तो हिमाचल में सभी सीट आराम से जीत सकते हैं। 78 वर्षीय चंद्रेश कुमारी ने कहा 2022 में चुनाव कौन लड़ेगा यह पार्टी तय करेगी। पार्टी जहां चाहेगी वह वहां कार्य के लिए तैयार हैं।

वीऱभद्र सिंह से भी लिया था पंगा

चंद्रेश कुमारी ने अपने 50 वर्ष की राजनीतिक यात्रा के साझा करते हुए कहा कि जहां से भी उन्होंने चुनाव लड़ा , वहां पर कई विकास कार्य करवाएं इनमें बमसन, थुरल व धर्मशाला शामिल है। उन्होंने कहा कि वह पहली हिमाचली महिला थी, जिसे कांग्रेस राष्ट्रीय दायित्व दिया गया था। 1986 में राज्य सभा सदस्य बनाया। 1999 में सोनिया गांधी ने महिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया। उसके बाद हिमाचल वापसी की और धर्मशाला से लड़कर चुनाव जीता और स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया।उन्‍होंने उस समय ही वीरभद्र सिंह को सीधे कह दिया था कि उन्‍हें मंत्री तो बना दिया है पर ट्रांसफर में हस्तक्षेप ना करें। चंद्रेश ने कहा कि उन्होंने कांगड़ा एयरपोर्ट राजीव गांधी को बोलकर बनवाया था और हिमाचल में आज भी यही एक एयरपोर्ट है जो अच्छे से चलता है। इतनी ही नहीं चंद्रेश ने कहा कि उन्हीं के समय में सेंट्रल यूनिवर्सिटी की घोषणा हुई थी। धर्मशाला के लिए ही यह स्वीकृत हुई थी और चिंता की बात है कि यह मामला आज भी खटाई में चला है। 2004 से आज दिन तक काम कर रही हूं और आगे काम करती रहूंगी। जाहिर है धर्मशाला को कर्मभूमि बताया बहुत कुछ संकेत दे गया है, जो आने वाले समय में धर्मशाला की राजनीति में एक हल चल पैदा कर सकता है।

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