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Rampur में Murder के दोषी को उम्रकैद, नाहन में क्लीनिक संचालक को 5 साल की कैद

जुर्माना अदा ना करने पर हत्या के दोषी को भुगतनी होगी 6 महीने की अतिरिक्त साधारण कैद

Rampur में Murder के दोषी को उम्रकैद, नाहन में क्लीनिक संचालक को 5 साल की कैद

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रामपुर /नाहन। हिमाचल के शिमला जिला के रामपुर (Rampur) की अदालत ने हत्या (Muder) के दोषी को आजीवन कारावास व 10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। यह सजा जिला एवं सत्र न्यायाधीश किन्नौर एट रामपुर की अदालत ने सुनाई है। जुर्माना अदा ना करने पर दोषी को 6 महीने की साधारण कैद भुगतनी होगी। जिला न्यायवादी सुरेश हसटा के अनुसार जय राम निवासी बिलाड़ा राजस्थान ने पुलिस में बयान दिया कि वह अपने 5 साथियों सहित किन्नौर (Kinnaur) में कारोबार के सिलसिले में आए थे। वह पुह के सेना क्षेत्र में रह रहे थे।

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19 मई, 2016 को रमेश और दोषी कृष्ण ने इकट्ठे शराब पीनी शुरु की। लगभग 4:15 बजे उसने चिल्लाने की आवाज सुनी, जिस पर वह शेड में गया। उसने देखा कि कृष्ण बैग उठाकर सड़क की ओर भाग रहा है। शेड में जाकर उसने देखा कि रमेश मृत पड़ा है, जिसके शरीर में घाव थे और उसके शरीर से खून बह रहा था। इसके बाद जयराम ने इस घटना कि सूचना सेना के अथॉरिटी को दी। आरोपी के खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का मामला (Murder Case) दर्ज किया। अदालत में कृष्ण के खिलाफ आरोप सही साबित होने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

 

नाहन की विशेष अदालत ने क्लीनिक संचालक को सुनाई सजा

नाहन। विशेष न्यायधीश जसवंत सिंह की अदालत ने बिना लाइसेंस क्लीनिक (without license clinics) चलाने व नशीली दवाइयां (Drugs) बेचने वाले एक संचालक को 5 साल की कठोर जेल व 1.20 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत में मामले की पैरवी उप जिला न्यायवादी एकलव्य ने की। मामला 2010 का है। उप जिला न्यायवादी एकलव्य ने बताया कि विशेष अदालत ने पांवटा के गोंदपुर में मैसर्ज पाठक क्लीनिक चलाने वाले विश्वजीत पाठक को ड्रग एंड कास्टेमिक एक्ट की धारा 27वी-2 में 5 साल की कठोर जेल व एक लाख रुपये जुर्माना व सेक्शन 28 में एक साल का कठोर कारावास ( imprisonment) व 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह दोनों सजाएं साथ चलेंगी।

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उन्होंने बताया कि 4.9.2010 को गोंदपुर में क्लीनिक चलाने वाले विश्वजीत की दुकान पर संबंधित विभाग ने दबिश दी थी। इस दौरान दुकान से नशीली व अंग्रेजी दवाइयां (medical shop) बरामद हुई, जिसका लाइसेंस वह पेश नहीं कर सका। इसके बाद मामले में विभाग के अलग-अलग ड्रग इंस्पेक्टर ने तफ्तीश की। मौजूदा समय में विभाग की ड्रग इंस्पेक्टर भूमिका मंगला ने इस मामले में सक्रियता से कार्रवाई कर अदालत में गवाह पेश किए। उन्होंने ड्रग विभाग (Drug department) की ओर से अदालत की कार्रवाई के दौरान गवाह पेश करने मे अपना भरपूर सहयोग दिया। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश जसवंत सिंह की अदालत ने आरोपी विश्वजीत को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट की दोनों धाराओं में मिली सजाएं एक साथ चलेंगी।

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