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In Depth: एक सप्ताह तक नहीं मिलेगा शक्तिपीठ माता बज्रेश्वरी देवी का चरणामृत, ये है वजह

In Depth: एक सप्ताह तक नहीं मिलेगा शक्तिपीठ माता बज्रेश्वरी देवी का चरणामृत, ये है वजह

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कांगड़ा। शक्तिपीठ माता बज्रेश्वरी देवी ( Mata Bajreshwari Devi ) मंदिर की पावन पिंडी पर मक्खन चढ़ाये जाने से अब श्रद्धालुओं को एक सप्ताह तक माता का चरणामृत ( Charanamrita ) प्राप्त नहीं होगा। चूंकि एक सप्ताह तक माता का स्नान नहीं किया जाएगा। माता की पिंडी पर चढ़ाए गए लगभग 18 क्विंटल मक्खन का श्रृंगार करने में लगभग पांच घंटे का समय लग गया। मंदिर के वरिष्ठ पुजारी सुशील कुमार व पंडित अरूण कुमार ने बताया कि माता की पिंडी के साथ भद्रकाली व एकादशी की पिंडी पर भी मक्खन चढ़ाया गया है। जबकि स्थापित सिंह वाहनी की पिंडी पर भी मक्खन से श्रृंगार किया गया है। माता की पिंडी पर लगभग 18 क्विंटल मक्खन का लेप लगाने का कार्य मंगलवार शाम सात बजे शुरू हो गया और रात बारह बजे तक मक्खन का कार्य चलता रहा। माता के श्रृंगार में काजू, बादाम, मेवे, अखरोट, बड़ी इलायची, काली मिर्च सहित कई मेवों से श्रृंगार किया गया है।

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मंदिर के वरिष्ठ पुजारी के अनुसार माता श्री बज्रेश्वरी देवी की मंदिर में तीन रूपों में पूजा की जाती है। पूरे वर्ष में एक दिन शक्तिपीठ माता बज्रेश्वरी देवी ( Mata Bajreshwari Devi ) मंदिर का दरबार घृत पर्व को लेकर पूरी रात खुला रहता है। हालांकि इस बार श्रद्धालुओं द्वारा लगभग 26 क्विंटल से ज्यादा देसी घी दान में दिया लेकिन 24 क्विंटल ही देसी घी से मक्खन बनाया जा सका। वहीं इस धार्मिक एतिहासिक आयोजन को लेकर श्रद्धालु दूर-दूर से श्रद्धालु कांगड़ा मंदिर पहुंचे थे। घृत पर्व के आयोजन को लेकर किए गए भगवती जागरण ने भी श्रद्धालुओं को आस्था के समुंदर में डुबो दिया। मंदिर सहायक आयुक्त व उपमंडलाधिकारी कांगड़ा जतिन लाल ने बताया कि मंदिर में घृत पर्व का आयोजन सफल व शांति पूर्ण रहा। वही मंदिर के वरिष्ठ पुजारी राम प्रसाद शर्मा का कहना था कि इस बार मंदिर परिसर में ऐसा भगवती जागरण व अदभुत नजारों को देखने के लिए हजारों श्रद्धालुओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया है।

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