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सैलरी से पहले पेंशन… पेंशनर्स हमारे ‘जीवित इतिहास’ अब दफ्तरों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति -डॉ. राजेश का ऐलान
HPBOSE: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए सम्मान और संवेदना की एक नई इबारत लिख दी है। धर्मशाला में आयोजित एक गरिमामय समारोह में बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने न केवल पेंशनर्स के लंबे संघर्ष और योगदान को सराहा, बल्कि एक ऐसी घोषणा की जिसने हॉल में मौजूद हर शख्स को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट कहा, “बोर्ड में अब सबसे पहले पेंशनर्स को पेंशन दी जाएगी, भले ही वर्तमान कर्मचारियों की सैलरी उसके बाद जारी हो।
पुरानी यादों का सम्मान, नई व्यवस्था का संकल्प
समारोह के दौरान अध्यक्ष ने भावुक होते हुए कहा कि बोर्ड की आज जो भी उपलब्धियां हैं, वे इन ‘समर्पित हाथों’ के अथक परिश्रम और ईमानदारी की नींव पर खड़ी हैं। उन्होंने पेंशनर्स को बोर्ड का ‘जीवित इतिहास’ करार देते हुए कहा कि बोर्ड अपने गुरुओं और पूर्व सहयोगियों के ऋण से कभी मुक्त नहीं हो सकता। यह आयोजन महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है जिन्होंने शिक्षा की नींव मजबूत की।
तकनीक से थमेगा फाइलों का चक्कर
पेंशनर्स को अपनी समस्याओं के लिए कार्यालयों की धूल न फांकनी पड़े, इसके लिए बोर्ड अब हाई-टेक होने जा रहा है। डॉ. शर्मा ने बताया कि एक ऐसी डिजिटल प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे पेंशनर्स घर बैठे अपनी शिकायतों और फाइल की स्थिति (Status) जान सकेंगे। पेंशन, मेडिकल बिल और अन्य प्रशासनिक कार्यों के निपटारे के लिए एक समयबद्ध और पारदर्शी सिस्टम बनाया जा रहा है, ताकि बुजुर्गों को अनावश्यक विलंब और असुविधा का सामना न करना पड़े।

संवाद का सिलसिला रहेगा जारी
सिर्फ एक बार का सम्मान नहीं, बल्कि अब पेंशनर्स और बोर्ड प्रबंधन के बीच सीधा संवाद नियमित रूप से होगा। अध्यक्ष ने सभी पूर्व कर्मियों को खुला निमंत्रण दिया कि वे अपने सुझाव और अनुभव बोर्ड के साथ साझा करें, ताकि वर्तमान व्यवस्था को अधिक मानवीय और उत्तरदायी बनाया जा सके। समारोह के अंत में प्रदेश भर से आए पेंशनर्स को सम्मानित कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया।
अमित महाजन
