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देश के 33 लाख बच्चों को नहीं मिलता है भरपेट भोजन, कुपोषण के मामले में पीएम का गृह राज्य टॉप तीन में शामिल

महाराष्ट्र , बिहार और गुजरात में कुपोषण के सबसे अधिक मामले आए सामने

देश के 33 लाख बच्चों को नहीं मिलता है भरपेट भोजन, कुपोषण के मामले में पीएम का गृह राज्य टॉप तीन में शामिल

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नई दिल्ली। भारत में कुपोषण (malnutrition) के मामले लगातार चिंता का सबब बने हुए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि देश में 33 लाख से अधिक बच्चे कुपोषण के शिकार है। चिंता की बात देश क लिए तीन राज्यों से सामने आई है। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के गृह राज्य गुजरात (Gujarat) भी शामिल है। कुपोषित बच्चों वाले राज्यों में महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात शीर्ष पर हैं।

Malnutrition

 

महिला एवं बाल विकास विभाग ने कोरोना महामारी के चलते स्वास्थ्य और पोषण संबंधी संकट और अधिक बढ़ने की आशंका जाहिर की है। मंत्रालय के अनुसार 14 अक्टूबर, 2021 की स्थिति के अनुसार देश में 17,76,902 बच्चे अत्यंत कुपोषित और 15,46,420 बच्चे अल्प कुपोषित हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आरटीआई के जवाब में कहा है कि 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के आंकड़ों से कुल 33,23,322 बच्चों के आंकड़े आए हैं। ये आंकड़े पिछले साल विकसित पोषण ऐप पर पंजीकृत किए गए, ताकि पोषण के परिणामों पर निगरानी रखी जा सके।

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मंत्रालय द्वारा बताया गया कि आंगनबाड़ी व्यवस्था में 8.19 करोड़ बच्चों में से केवल 33 लाख बच्चे कुपोषित हैं। जो कुल बच्चों का केवल 4.04 प्रतिशत है। बता दें कि ये संख्या मंत्रालय को सता रही है। नवंबर 2020 से 14 अक्टूबर, 2021 के बीच गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या में 91 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी है। डॉक्टर्स बताते हैं कि अत्यंत कुपोषण और अल्प कुपोषण दोनों का ही बच्चों के स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। जिससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक क्षमता पर दीर्घकालिक असर रहता है। कुपोषण के शिकार बच्चों में सामान्य बच्चों के मुकाबले बीमार होने का खतरा नौ गुना बढ़ जाता है।

Malnutrition

 

आरटीआई कानून के तहत मिले जवाब के अनुसार, महाराष्ट्र में कुपोषित बच्चों की संख्या सबसे अधिक 6,16,772 (6.16 लाख) दर्ज की गई है। जिसमें 1,57,984 (1.57 लाख) अत्यंत कुपोषित बच्चे और 4,58,788 (4.58 लाख) अल्प कुपोषित बच्चे थे। वहीं, कुपोषण के मामले में दूसरे पायदान पर बिहार है। प्रदेश में 4,75,824 (4.75 लाख) कुपोषित बच्चे हैं। जिनमें 3,23,741 अत्यंत कुपोषित और 1,52,083 अल्प कुपोषित बच्चे हैं।

इस मामले में तीसरा नंबर पीएम के गृह राज्य गुजरात का आता है। गुजरात में 1.55 लाख अल्प कुपोषित बच्चे और 1.65 लाख कुपोषित बच्चे हैं। इसी तरह आंध्र प्रदेश में 2.76 लाख और कर्नाटक में 2.49 लाख कुपोषित बच्चों की संख्या दर्ज की गई है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में 1.86 लाख, तमिलनाडु में 1.78 लाख, असम में 1.76 लाख, और तेलंगाना में 1.52 लाख कुपोषित बच्चे हैं। राजधानी दिल्ली के भी कुपोषण के मामले में हाल बुरे हैं। यहां कुल 1.17 लाख कुपोषित बच्चे हैं, जिसमें से 20,122 अल्प कुपोषित और 97,223 अत्यंत कुपोषित बच्चे हैं।

क्या है कुपोषण की परिभाषा

शरीर के लिए आवश्यक सन्तुलित आहार लम्बे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। अत: कुपोषण की जानकारियां होना अत्यन्त जरूरी है। कुपोषण दरअसल पर्याप्त सन्तुलित अहार के आभाव में होता है। बच्चों और स्त्रियों के अधिकांश रोगों की जड़ में कुपोषण ही होता है। स्त्रियों में रक्ताल्पता या घेंघा रोग अथवा बच्चों में सूखा रोग या रतौंधी और यहाँ तक कि अंधत्व भी कुपोषण के ही दुष्परिणाम हैं। इसके अलावा ऐसे पचासों रोग हैं जिनका कारण अपर्याप्त या असन्तुलित भोजन होता है।

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