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बैलेट पेपर से नहीं…ईवीएम से भी नहीं, इस देश में अलग तरीके से होता है राष्ट्रपति का चुनाव

गांबिया में कंचों से डाले जाते हैं वोट, मत पेटियों की जगह होते हैं ड्रम

बैलेट पेपर से नहीं…ईवीएम से भी नहीं, इस देश में अलग तरीके से होता है राष्ट्रपति का चुनाव

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भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। यहां की संघीय सरकार प्रत्येक पांच वर्ष के अंतराल पर चुनाव (Chunav) के माध्यम से चुनी जाती है। देश के नागरिक इस चुनावी प्रक्रिया में सीधे तौर पर भाग लेते हैं। आपने भी वोट डाला होगा, लेकिन अब हम जिस देश की बात करने जा रहे हैं उस देश में चुनाव न तो ईवीएम (EVM) से होता है और ना ही बैलेट पेपर से। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस देश में कंचों (Marbles) से होती है। वो ही कंचे जो आपने बचपन में खेले होंगे। यह देश है वेस्ट अफ्रीका देश गांबिया (West Africa Country Gambia)। शायद ही आपने इस देश का नाम सुना होगा। अच्छा तो अब हम आपको बताते हैं कि इस देश में कंचों से चुनाव (Election) कैसे होता है, लेकिन यह जानने से पहले आप यह जान लें कि आखिर वहां उम्मीदवार का कैसे चुनाव होता है।

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वैसे तो हाल ही में चार दिसंबर को गांबिया में चुनाव हुए थे और चुनाव से पहले ही कह दिया गया था कि चुनाव में कंचों का ही इस्तेमाल होगा और कंचों के जरिए वोट (Vote) डाले जाएंगे। वहां सिंगल राउंड में वोटिंग होती है और चुनाव के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव होता हैए जो कि पांच साल के लिए चुना जाता है। जिन लोगों को वोट डालने होते हैं, उनके लिए भारत (Bharat) की तरह पोलिंग स्टेशन बनाए जाते हैं, जहां अधिकारियों की जरिए चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाती है। वोट देने के बाद वहां भी अंगुली पर निशान लगाया जाता है, लेकिन बैलेट पेपर और वोटिंग मशीन के स्थान पर वहां मार्बल्स यानी कंचों का इस्तेमाल किया जाता हैं। जब कोई व्यक्ति वोट देने जाता है तो उसे एक कंचा दिया जाता है। इसके बाद हर उम्मीदवार का वहां ड्रम पड़ होता हैए जो अलग.अलग रंग का होता है। इसके लिए हर ड्रम पर उम्मीदवार का नाम लिखा होता है। व्यक्ति जिस उम्मीदवार को वोट देना चाहता है, उसके ड्रम में वो कंचा डाल देता है। उस ड्रम को अलग तरह से डिजाइन किया जाता है, जिसमें ड्रम पूरी तरह से पैक होता है, लेकिन ऊपर एक ट्यूब (Tube) की तरह नली होती है,

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जिसमें से कंचों को अंदर डाला जाता है। जब वोटों की गिनती करनी होती है, तो हर ड्रम को मत पेटी की तरह खोला जाता है। इसके बाद ड्रम में पड़े कंचों को गिना जाता है और जितने कंचे होते हैं, वो बताते हैं कि कितने वोट पड़े। इन्हें गिनने के लिए एक खास तरह की ट्रे होती है, जिसमें कंचों की शेप के सांचे बने होते हैंए जिसमें कंचों को फिट किया जाता है। उसके बाद उस ट्रे से कंचों की गिनती की जाती है और कंचों को वोट के तौर पर गिना जाता है। यह चुनावी व्यवस्था काफी अलग है, जो गांबिया में की जाती है। बता दें कि इस तरह की चुनाव व्यवस्था 1965 में अंग्रेजों ने ही लागू की थी, जो अभी तक चली आ रही है। अब यहां के लोग भी इस व्यवस्था से आदि हो चुके हैं और वो इसी तरह से चुनाव करना चाहते हैं।

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