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हम लोकतांत्रिक आदर्शों के लिए प्रतिबद्ध रहे, यही विकास का उत्तम मार्ग- राष्ट्रपति कोविंद

हम लोकतांत्रिक आदर्शों के लिए प्रतिबद्ध रहे, यही विकास का उत्तम मार्ग- राष्ट्रपति कोविंद

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नई दिल्ली। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) ने 71वें गणतंत्र दिवस (71st Republic Day) की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित (Addressed to the nation) किया। राष्ट्रपति ने कहा कि लोगों से ही देश बनता है। उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकानाएं देते हुए कहा कि हमारे संविधान ने हम सब को एक स्वाधीन लोकतंत्र के नागरिक के रूप में कुछ अधिकार प्रदान किए हैं। लेकिन संविधान के अंतर्गत ही, हम सब ने यह ज़िम्मेदारी भी ली है कि हम न्याय, स्वतंत्रता और समानता तथा भाईचारे के मूलभूत लोकतान्त्रिक आदर्शों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहें। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति नागरिकों में ही निहित है। हम महात्मा गांधी के आदर्शों को मानते हुए लोकतांत्रिक आदर्शों के लिए प्रतिबद्ध रहें, यही विकास का उत्तम मार्ग है।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रवासी भारतीयों ने विदेशों में रहते हुए न केवल वहां की प्रगति में योगदान दिया, बल्कि अपनी भारतीय संस्कृति को भी सहेजा है। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, इस महीने के आरंभ में, मुझे देश के ऐसे ही कुछ कर्मठ लोगों से मिलने और उनके साथ बातचीत करने का अवसर मिला, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय काम किया है। ऐसे लोग यह सिद्ध करते हैं कि सामान्य व्यक्ति भी, अपने आदर्शों और कर्मठता के बल पर, समाज में बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, देश की सेनाओं, अर्धसैनिक बलों और आंतरिक सुरक्षा बलों की मैं मुक्त-कंठ से प्रशंसा करता हूं। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने में उनका बलिदान, अद्वितीय साहस और अनुशासन की अमर गाथाएं प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रपति ने मोदी सरकार के कुछ योजनाओं की तारीफ करते हुए कहा कि जन-कल्याण के लिए, सरकार ने कई अभियान चलाए हैं। ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ की उपलब्धियां गर्व करने योग्य हैं। लक्ष्य को पूरा करते हुए, 8 करोड़ लाभार्थियों को इस योजना में शामिल किया जा चुका है। ऐसा होने से, जरूरतमंद लोगों को अब स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिल पा रही है। ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ के माध्यम से लगभग 14 करोड़ से अधिक किसान भाई-बहन प्रति वर्ष 6 हजार रुपए की न्यूनतम आय प्राप्त करने के हकदार बने हैं। इससे हमारे अन्नदाताओं को सम्मानपूर्वक जीवन बिताने में सहायता मिल रही है। उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि भारत में सदैव ज्ञान को शक्ति, प्रसिद्धि या धन से अधिक मूल्यवान माना जाता है। शैक्षिक संस्थाओं को भारतीय परंपरा में ज्ञान अर्जित करने का स्थान अर्थात विद्या का मंदिर माना जाता है।

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