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धातु से सना बर्तन सिंक में भूले Scientist ने की धातु खाने वाले बैक्टीरिया की खोज
नई दिल्ली। कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है, लेकिन कई सारे आविष्कार गलतियों के कारण भी हो जाया करते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ कैलिफॉर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) के माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स के साथ। जिन्होंने अनजाने में एक ऐसा बैक्टीरिया खोज निकाला है जो धातु खा सकता है। दरअसल, एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट कई महीने के लिए बाहर जाने से पहले मैंगनीज़ से सना बर्तन सिंक में रखकर भूल गया था। लौटने पर उन्होंने उसे काले तत्व से ढका पाया जो नए बैक्टीरिया के कारण बना ऑक्सीडाइज़्ड मैंगनीज़ था। हालांकि अभी उन्होंने इसे कोई नाम नहीं दिया है। बैक्टीरयल कैमोलिथोऑटोट्रॉफी वाया मैंगनीज ऑक्सीडेशन शीर्षक से नेचर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक यह पहला ऐसा बैक्टीरिया है जो अपने ईंधन के लिए मैंगनीज खाता है। जब यह बैक्टीरिया धातु के संपर्क में आता है तो वह उसे प्रोटोन देने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में ऑक्सीकरण होता है जिससे मैंगनीज ऑक्साइड का निर्माण होता है। यह बैक्टीरिया मैंगनीज का उपयोग कैमोसिंथेसिस के लिए करते हैं। यह कार्बन डाइऑक्साइड को बायोमास में बदलने की प्रक्रिया है।
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यहां पढ़ें किस तरह हुई बैक्टीरिया की खोज
वहीं इस बैक्टीरिया की खोज से जुड़ा किस्सा शेयर करते हुए एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि डॉ जैरेड ने एक ग्लास जार एक नल के पानी से भीगे पदार्थ से ढककर अपने ऑफिस के सिंक में छोड़ दिया था। यह जार कई महीनों तक वैसा ही पड़ा रहा। जब वे लौटे तो उन्होंने देखा कि जार पर एक गहरे रंग के पदार्थ की परत चढ़ गई है। ये एक काई की परत जैसी थी। उन्होंने माइक्रोस्कोप से इसकी जांच की तो एक नए तरह का बैक्टीरिया सामने आया। डॉ जैरेड ने बताया कि यह परत ऑक्सीकृत मैंगनीज है जो एक नए बैक्टीरिया की वजह से बनी है जो नल के पानी में मिल सकता है। खोजकर्ता का मानना है कि ये इकलौता बैक्टीरिया नहीं हैं जो धातु खाता है। इससे पहले भी कुछ ऐसे मिलते-जुलते बैक्टीरिया मिले हैं जो जमीन के नीचे पानी में रहते हैं। ऐसे में नए बैक्टीरिया की मदद से उनके बारे में जानने में आसानी होगी। इतना ही नहीं इस अध्ययन से उन्हें जमीन के अंदर के पानी के बारे बेहतर जानकारी मिल सकेगी। साथ ही वे उन सिस्टम को समझ सकेंगे जो मैंगनीज ऑक्साइड के कारण बंद या चोक हो जाते हैं।

