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पहाड़ी राज्यों में लगातार बढ़ रहे #Suicide के मामले, जानें किस तरह के विवाद में गईं सबसे ज्यादा जानें

10 हिमालयन राज्यों में उत्तराखंड तीसरे नंबर है

पहाड़ी राज्यों में लगातार बढ़ रहे #Suicide के मामले, जानें किस तरह के विवाद में गईं सबसे ज्यादा जानें

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देहरादून। देश के हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों से आए दिन आत्महत्या (Suicide) करने की खबरें सामने आ ही जाया करती हैं। एक माह पूर्व आई एक रिपोर्ट जहां बताया गया था कि हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के पहले तीन माह में राज्य में आत्महत्या के मामले उसके पहले के तीन महीनों के मुकाबले दोगुना रहे हैं। वहीं, अब इसी तरह की एक रिपोर्ट देश के सभी राज्य के संबंध में सामने आई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2018 के मुकाबले साल 2019 में उत्तराखंड में आत्महत्या के मामलों में 22 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पारिवारिक कलह के चलते गईं सबसे ज्यादा जानें

इस रिपोर्ट के अनुसार इनमें सबसे ज्यादा ऐसे मामले में जिनमें पारिवारिक कारणों से मौत को गले लगाया गया है। पारिवारिक विवादों के कारण आत्महत्या करने वाले लोगों के आंकड़ों में उत्तराखंड ने देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। उत्तराखंड में 76 प्रतिशत से ज्यादा आत्महत्या के कदम पारिवारिक विवाद के कारण उठाए गए। वहीं, 10 हिमालयन राज्यों में उत्तराखंड तीसरे नंबर है। पहले नंबर पर 728 आत्महत्या के मामलों के साथ त्रिपुरा है जबकि हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) 584 मामलों के साथ दूसरे नंबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड के 516 आत्महत्या के मामलों में 394 ऐसे हैं, जिनकी वजह पारिवारिक कलह या विवाद रही है।

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इनमें से 260 पुरुषों ने जबकि 134 महिलाओं ने आत्महत्या का कदम उठाया है। प्रेम प्रसंग के मामलों में आत्महत्या के 35 मामले सामने आए। इसमें 22 पुरुषों ने जबकि 13 महिलाओं ने आत्महत्या की। शादी ठीक से ना निभा पाने की वजह से आतमहत्या करने वालों की संख्या 25 रही। इसके अलावा ड्रग अब्यूज या अल्कोहॉल अडिक्शन की वजह से 15 लोगों ने मौत का रास्ता चुना। इस दौरान 54 छात्रों ने और 83 बेरोजगार लोगों ने आत्महत्या से अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

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