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Lockdown ने कर दिया कमाल, 16 साल बाद अपनों से मिल पाया मंडी का बुजुर्ग-जानिए कैसे
मंडी। बेशक लॉक डाउन के कारण देश इस वक्त परेशानियों में है, लेकिन इसके कुछ पॉजिटिव रिजल्ट भी सामने आ रहे हैं। लॉकडाउन (Lockdown) के कारण 16 वर्ष से लापता शख्स भी अपने घर पहुंच गया। जिस तरह से इस शख्स के घर पहुंचने की कहानी है, उसके पीछे का क्रेडिट लॉकडाउन को ही जाता है। क्या है पूरा मामला, जानिए इस रिपोर्ट में। बल्हघाटी के सोयरा गांव का सुंदर सिंह लॉकडाउन के कारण 16 वर्ष के बाद अपने घर पहुंच पाया है। अगर लॉकडाउन ना हुआ होता तो शायद ही सुंदर सिंह कभी अपने घर पहुंच पाता। दरअसल सुंदर सिंह प्रदेश के बाहर दर्जी का काम करता था।
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2004 में अपनी बड़ी बेटी की शादी करवाने के बाद सुंदर सिंह वापस अपने काम के लिए चला गया और उसके बाद लौटकर नहीं आया। सुंदर सिंह कहां और किन परिस्थितियों में रहा इसकी परिवार को कोई जानकारी नहीं मिली। 2013-14 में सुंदर सिंह के बेटे की सड़क दुर्घटना (Road Accident) में मौत हो गई। उसके बाद परिवार वालों ने सुंदर सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई, लेकिन पुलिस भी इसे ढूंढ नहीं पाई। अभी जो जानकारी मिली है उसके अनुसार सुंदर सिंह को आंखों से दिखाई देना लगभग बंद हो गया है और उसे किसी की कोई पहचान नहीं है। ऐसा बताया जा रहा है कि सुंदर सिंह चंडीगढ़ के आसपास कहीं रहता था। लॉकडाउन के बाद से सुंदर सिंह ने नालागढ़ (Nalagarh) स्थित राधा स्वामी सत्संग ब्यास के भवन में शरण ले रखी थी। इसे शेल्टर होम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन जब सभी यहां से चले गए तो सुंदर सिंह अकेले रह गए। ऐसे में इन्हें रोज खाना खिलाने वाले नालागढ़ निवासी राजेश कुमार जब इनसे इनके और परिवार के बारे में पूछा तो इन्होंने अपने घर का पता बताया। राजेश कुमार ने छानबीन की और सोयरा पंचायत के उपप्रधान प्रकाश चंद शर्मा से संपर्क साधा। पंचायत उप्रपधान ने जब कन्फर्म कर दिया कि सुंदर सिंह उन्हीं की पंचायत का रहने वाला है तो उसके बाद आज राजेश कुमार और गुरचरण सिंह इन्हें अपनी गाड़ी में नालागढ़ से लाए और सोयरा स्थित उनके घर पर परिजनों के हवाले किया।
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सुंदर सिंह के 16 वर्ष बाद घर पहुंचने पर परिवार के सदस्यों की आंखें भर आई। सुंदर सिंह को अभी यह नहीं मालूम की उनके इकलौते बेटे की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि इन्हें आंखों से दिखाई नहीं दे रहा और अभी परिवार के सदस्यों ने इन्हें होम क्वारंटाइन (Home Quarantine) में रखा है। आने वाले दिनों में इन्हें सारी बातें बताई जाएंगी और इनसे बातें जानी जाएंगी कि ये इतने वर्ष तक कहां और किन हालातों में रहे। छोटे भाई सीता राम वर्मा ने बताया कि 2004 के बाद सुंदर सिंह का कोई अता-पता नहीं था। पुलिस (Police) में भी शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन सुंदर सिंह कहीं नहीं मिला। अब सुंदर सिंह को नालागढ़ के लोगों ने घर छोड़ा है। इन्होंने इन युवकों का दिल से आभार जताया है और इन्हें अपनी दुआएं दी हैं।
अगर लॉकडाउन ना होता तो शायद सुंदर सिंह कभी नालागढ़ में राधा स्वामी के शेल्टर होम नहीं पहुंचता और फिर वहां से अपने घर। लॉकडाउन ने 64 वर्ष की उम्र में सुंदर सिंह को अपने घर तो पहुंचा दिया है। परिवार की खुशी का कोई ठीकाना नहीं और उन दो युवाओं का परिवार आभार जताते नहीं थक रहा जिन्होंने फरिश्ता बनकर इन्हें घर पहुंचाया है।
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