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ये हैं दुनिया के ऐसे 5 वैज्ञानिक जिनके आविष्कार ने ही ले ली इनकी जान

बड़े काम के हैं इन आविष्कारकों के आविष्कार पर खुद नहीं कर पाए इस्तेमाल

ये हैं दुनिया के ऐसे 5 वैज्ञानिक जिनके आविष्कार ने ही ले ली इनकी जान

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जबसे ये दुनिया बनी है तबसे ना जाने इंसान कितने ही आविष्कार कर चुका है। कई विफल होते हैं तो कई इसमें सफल होते हैं। हमारी आसपास कितनी ही ऐसी चीजें हैं जिनको किसने बनाया शायद हम उसका नाम तक नहीं जानते लेकिन उनकी बनाई चीजें आज हमारे काम आ रही हैं। समय के साथ-साथ इंसान की आवश्यकताएं भी बढ़ती जाती हैं और आविष्कारों (Invention) का सिलसिला भी बढ़ता जाता है। किसी भी चीज का आविष्कार करना आसान काम नहीं होता। इसमें वैज्ञानिकों (Scientists) को कई साल लग जाते हैं तब जाकर वो सफल हो पाते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही आविष्कारकों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके आविष्कार तो बहुत उपयोगी साबित हुए, लेकिन दुख की बात ये है कि इनको अपने ही आविष्कार की वजह जान गंवानी पड़ी।

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विलियम बुलोक – अमेरिका के ग्रीनविले में जन्मे विलियम बुलोक को रिचर्ड मार्च होई के बनाए ‘रोटरी प्रिंटिंग प्रेस’ में सुधार के लिए जाना जाता है। उनकी वजह से ही प्रिंटिंग इंडस्ट्री में क्रांतिकारी परिवर्तन आया था। अपनी ही प्रिंटिंग मशीन को ठीक करने के दौरान उसमें फंसकर उनकी मौत हो गई थी।

हॉरेस लॉसन हन्ली – अमेरिका के समर काउंटी में 29 दिसंबर, 1823 को जन्मे हॉरेस लॉसन हन्ली ने हाथ से चलने वाली पनडुब्बी का आविष्कार किया था। परीक्षण के दौरान उनकी पनडुब्बी समुद्र में डूब गई थी। वो भी अपने क्रू-मेंबर्स के साथ उसी में मौजूद थे। इस हादसे में उनकी मौत हो गई थी।

फ्रांज रीचेल्ट – ऑस्ट्रिया में जन्मे फ्रांज रीचेल्ट को आधुनिक विंगसूट का आविष्कारक माना जाता है। इसकी टेस्टिंग के लिए जब वो पेरिस के एफिल टावर से कूदे तो इस दौरान उनकी मौत हो गई थी। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 33 साल थी।

हेनरी स्मोलिंस्की – हेनरी स्मोलिंस्की को उड़ने वाली कार बनाने के लिए जाना जाता है। 1973 में उन्होंने यह आविष्कार किया था, जिसका नाम उन्होंने ‘एवीई मिजार’ रखा था। टेस्ट करने के लिए जब वो अपनी फ्लाइंग कार में बैठे और उसे उड़ाया तो कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे उनकी मौत हो गई।

मैरी क्यूरी – रेडियम और पोलोनियम नाम के दो तत्वों की खोज करने वाली मशहूर भौतिकविद और रसायन शास्त्री मैरी क्यूरी की मौत भी उनकी इसी खोज के कारण साल 1934 में हो गई थी। मैरी क्यूरी रेडियोएक्टिविटी पर काम कर रही थीं, लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि रेडियोएक्टिविटी कितनी खतरनाक होती है। उनके शरीर पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा था, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई थी।

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