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बड़ी चुनौती: इस ‘भूखे’ ने Quarantine Center में मचाया तहलका; रोज खाता है 10 लोगों का खाना

बड़ी चुनौती: इस ‘भूखे’ ने Quarantine Center में मचाया तहलका; रोज खाता है 10 लोगों का खाना

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बक्सर। पूरे देश में जारी कोरोना वायरस (Coronavirus) के कहर के बीच अपने घर से दूर दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। अब जब वे अपने घरों को लौटने लगे हैं, तो सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा उस इलाके में कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इन सभी लोगों को क्वारंटाइन करना पड़ रहा है। इस सब के बीच देश भर के कई क्वारंटाइन सेंटर से कई तरह की समस्याओं की खबर सामने आ रही है, लेकिन बिहार के बक्सर (Buxar) जिले से जो मामला सामने आया है। वह अपने आप में बिलकुल अनोखा है। दरअसल यहां स्थित मझवारी क्वारंटाइन सेंटर में निगरानी में रखे गए अनूप ओझा नामक व्यक्ति के निवाले ने पूरे क्वारंटाइन सेंटर का दिवाला निकाल रखा है।

एक बार में आठ-दस प्लेट चावल या 30-35 रोटी के साथ दाल-सब्जी निपटा देते हैं अनूप

रिपोर्ट्स के अनुसार इस युवक की भूख (hunger) ने सबको हैरत में डाल दिया है। इस युवक की नाश्ते की खुराक में 40 रोटी और कई प्लेट चावल होते हैं। यह व्यक्ति एक बार में आठ-दस प्लेट चावल या 30-35 रोटी के साथ दाल-सब्जी निपटा देता है। ऐसे में युवक के लिए खाने का इंतजाम करना क्वारंटाइन सेंटर की देखरेख में जुटे लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। सामान्य कद-काठी वाले युवक का यह निवाला प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया और अंचलाधिकारी खुद युवक से मिलने पहुंच रहे हैं।

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तीन-चार दिन पहले केंद्र पर लिट्टी-चोखा बना, 83 लिट्टी अकेले खा गए

अनूप स्वयं स्वीकार करते हैं कि वो 30-32 रोटी से नाश्ता (Breakfast) करते हैं। अनूप सिमरी प्रखंड के खरहाटांड़ गांव निवासी गोपाल ओझा के पुत्र हैं और एक सप्ताह पहले क्वारंटाइन केंद्र में आए हैं। अनूप रोजी रोटी की तलाश में राजस्थान गए थे। एक सप्ताह पहले श्रमिक स्पेशल ट्रेन से वे बक्सर पहुंचे और सिमरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में परीक्षण के बाद उन्हें केंद्र में 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया गया। क्वारंटाइन सेंटर में उनकी भूख के लिए खाने का इंतजाम करना किसी चुनौती से कम नहीं है। अनूप के लिए यहां विशेष व्यवस्था होती है। चावल में तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उनके अकेले 30-35 रोटी खाने के कारण रोटी सेंकने वालों के भी पसीने छूट जाते हैं। तीन-चार दिन पहले केंद्र पर लिट्टी-चोखा बना था और उस दिन वे 83 लिट्टी अकेले खा गए।

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