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भारत को ग्लासगो में स्पेशल ट्रीटमेंट मिलने पर बिदक गया पाकिस्तान का दोस्त

पीएम मोदी को मिला था स्पेशल ट्रीटमेंट

भारत को ग्लासगो में स्पेशल ट्रीटमेंट मिलने पर बिदक गया पाकिस्तान का दोस्त

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नई दिल्ली। भारत (India) के कॉप26 में मिले स्पेशल ट्रीटमेंट देखकर पाकिस्तान का दोस्त तुर्की बिदक गया। तुर्की ने विरोध जाताते हुए कहा कि ब्रिटेन ने इस सम्मेलन में भारत को अधिक तवज्जो दी है। अब विस्तार से बताते हैं आखिर क्या है पूरा माजरा।

दरअसल, धरती को बचाने के लिए कॉप 26 का आयोजन स्कॉटलैंड की राजधानी ग्लासगो शहर में हुआ था। इस वैश्विक कार्यक्रम की मेजबानी के लिए यूके के पास पर्याप्त साधन नहीं थे। इसके चलते सम्मेलन में शामिल होने वाले देशों के प्रतिनिधिमंडलों से यूके ने होटल शेयर करने का आग्रह किया था। इसके अलावा कई देशों के प्रमुखों को सम्मेलन स्थल तक ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई थी। मगर अमेरिका (America) और भारत (India) को ब्रिटेन ने स्पेशल ट्रीटमेंट दिया। इस आयोजन में मेजबान यूके, भारत और अमेरिका अपवाद साबित हुए।

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तीनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को उन होटलों में रहने की अनुमति दी गई थी, जिसे उन्होंने अपने लिए बुक किया था। इधर, सम्मेलन में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन कारों के काफिले के साथ ग्लासगो पहुंचे थे। तुर्की के राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि आखिर भारत के लिए अलग इंतजाम क्यों किए गए थे।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अब खबर सामने आ रही है कि प्रोटोकॉल में भेदभाव पर तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। एर्दोगन रोम में G20 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ बैठक करने के बाद स्कॉटलैंड में ग्लासगो की यात्रा करने वाले थे, लेकिन फिर उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी।

तुर्की के राष्ट्रपति ने इस मामले में कहा था कि कुछ सुरक्षा प्रोटोकॉल थे, जिनकी हमने मांग की थी। उन्होंने कहा कि हमें अंतिम समय में बताया गया था कि हमारी मांगें पूरी नहीं हो पाएंगी। हमें बाद में पता चला कि इससे पहले भी एक देश के लिए अपवादस्वरूप कुछ कदम उठाए गए थे जो राजनयिक प्रोटोकॉल के खिलाफ है। हम इस बात को स्वीकार नहीं कर पाए। फिर हमने ग्लासगो नहीं जाने का फैसला किया। ये फैसला हमारे देश की प्रतिष्ठा को लेकर था। हम अपने देश के लोगों के हितों की रक्षा के लिए बाध्य हैं। हमने दिखाया है कि हम निष्पक्ष दृष्टिकोण से ही एक निष्पक्ष दुनिया का निर्माण कर सकते हैं।

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