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फाल्गुन प्रदोष व्रत : भगवान शिव की पूजा व व्रत रखने से पूरी होती हैं मनोकामनाएं
हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है। ये व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक विशेष दिन माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि यह प्रदोष व्रत करने से जातक के सभी पाप धुल जाते हैं और उन्हें शिव धाम की प्राप्ति होती है। इस बार बुध प्रदोष व्रत 11मार्च यानी सोमवार को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

शुभ मुहूर्त
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 11 मार्च को सुबह 8 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगी। त्रयोदशी तिथि का समापन 12 मार्च को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर होगा। ऐसे में प्रदोष व्रत 11 मार्च 2025 को किया जाएगा। प्रदोष पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 47 मिनट से रात 9 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।

पूजन सामग्री
धूप, दीप, घी, सफेद पुष्प, सफेद फूलों की माला, आंकड़े का फूल, सफेद मिठाइयां, सफेद चंदन, सफेद वस्त्र, जल से भरा हुआ कलश, कपूर, आरती के लिए थाली, बेल-पत्र, धतुरा, भांग, हवन सामग्री, आम की लकड़ी।
व्रत की विधि
प्रदोष व्रत के दिन व्रती को प्रात:काल उठकर नित्य क्रम से निवृत हो स्नान कर शिव जी का पूजन करना चाहिए। पूरे दिन मन ही मन “ॐ नम: शिवाय ” का जप करें। पूरे दिन निराहार रहें।
पूजा स्थल अथवा पूजा गृह को शुद्ध कर लें। चाहे तो शिव मंदिर में भी जा कर पूजा कर सकते हैं। पांच रंगों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार करें। पूजन की सभी सामग्री एकत्रित कर लें। कलश अथवा लोटे में शुद्ध जल भर लें। कुश के आसन पर बैठ कर शिव जी की पूजा विधि-विधान से करें। “ॐ नम: शिवाय” बोलते हुए शिव जी को जल अर्पित करें। इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर भगवान शिव का ध्यान करें।
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
घर के मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, फूल, फल, मिठाई और अपनी पसंदीदा मिठाई का भोग लगाएं।
भगवान शिव की आरती करें और उनसे अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करें।
दिन भर उपवास रखें और शाम को भगवान शिव को भोग लगाकर व्रत खोलें।
व्रत खोलने के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को दान अवश्य करें।
