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सावधान! इन बीमारियों से बचना है तो 50 के बाद रखें अपना ख्याल

सावधान! इन बीमारियों से बचना है तो 50 के बाद रखें अपना ख्याल

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आम तौर पर 50 की उम्र को बुढ़ापे की शुरुआत माना जाता है। अगर हम अपने शरीर की ओर ध्यान न दें तो 50 की उम्र के बाद शरीर कमजोर होने लगता है। साथ ही बीमारियां भी परेशान करने लगती है। वैसे तो आज के दौर में लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहते हैं पर बहुत सारे लोग इस उम्र में पहुंच कर जरा उदासीन हो जाते हैं और अपने स्वास्थय की ओर ध्यान नहीं देते। नतीजा उम्र बढ़ने के साथ ऐसे लोगों को हाई ब्‍लड प्रेशर, हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा, ऑस्टियोआर्थराइटिस, मांसपेशियों, कमर व हड्डियों में दर्द की समस्‍या होने लगती है। इसलिए अगर आप भी उनमें शामिल हैं तो जरा सोचना शुरू करें और सक्रिय जीवनशैली जीने का प्रयास करें। अपनी फिटनेस की तरफ अगर थोड़ा सा ध्यान देंगे तो आप इन बीमारियों से काफी हद तक बच सकते हैं।

 

डायबिटीजः आज को दौर में डायबिटीज रोगियों बढ़ रही है। खासकर मिडल एज या फिर ज्‍यादा बूढ़े लोग इस बीमारी के घेरे में आ रहे हैं। सीडीसी के मुताबिक, 45 साल की उम्र के बाद ही डायबिटीज होने का खतरा बढ़ने लग जाता है, और यह गंभीर हो सकता है। डायबिटीज से बचाव के लिए जरूरी है कि आप अपने ब्‍लड शुगर की जांच नियमित रूप से कराएं। रोजाना एक्‍सरसाइज करें, तनाव से दूर रहें और हेल्‍दी डाइट लें।

उच्च रक्तचापः जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, रक्त वाहिकाओं का लचीलापन कम होने लगता है। इससे आपके शरीर में रक्त पहुंचाने वाली प्रणाली पर दबाव पड़ता है। शोध के मुताबिक, 60 से अधिक आयु वाले अधिकांश लोगों में उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या देखने को मिलती है। उच्‍च रक्‍तचाप के कुछ कारण जिनपर लगाम लगाकर आप खुद को स्‍वस्‍थ रख सकते हैं। ।

हृदय रोगः जब धमनियों में प्लाक का निर्माण होने लगता है तो यह हृदय रोग का कारण बनता है। यह बचपन से शुरू होकर और आपकी उम्र के अनुसार खराब हो जाता है। इसीलिए 40 से 59 वर्ष की आयु के लोगों में हृदय रोग होने की संभावना 20 से 39 आयु वर्ग के लोगों की तुलना में पांच गुना अधिक होती है। हृदय रोग से बचने के लिए मोटापा कम करने की आवश्‍यकता है।

मोटापाः आज के समय में लोग मोटा होने से बचने के लिए तरह- तरह के नुस्थे अपना रहे हैं। अगर आप का वजन कुछ ज्यादा है। तो आपअपनी बीएमआई की जांच जरूर करवाएं। मोटापा कम से कम 20 पुरानी बीमारियों से जुड़ा हुआ है, जिनमें हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, कैंसर, उच्च रक्तचाप और गठिया शामिल हैं। मोटापे को कम करने के लिए दवाओं का सहारा कभी न लें। दिनचर्टा में बदलाव लाकर मोटापे को कम किया जा सकता है।

ऑस्टियोआर्थराइटिसः ऑस्टियोआर्थराइटिस का जीवनशैली और आनुवंशिकता से कोई लेना देना नहीं है। इसके लिए पुरानी चोटें, शारीरिक गतिविधि की कमी, मधुमेह और मोटापा जिम्‍मेदार है। उम्र बढ़ने के साथ ज्‍वाइंट पेन की समस्‍या बढ़ने लगती है। ,इसके लिए जरूरी है कि आप नियमित रूप से एक्‍सरसाइज करें, किसी भी प्रकार की चोट का उपचार सही ढंग से कराएं।

अगर आप 50 की उम्र के बाद सही मायने में खुद को स्‍वस्‍थ रखना चाहते हैं तो आपको अपनी शारीरिक गतिविधि को बढ़ाने की आवश्‍यकता है। नियमित एक्‍सरसाइज जरूर करें, हेल्‍दी डाइट को फॉलो करें। अपनी तनाव पूर्ण जीवनशैली को सुधारने का प्रयास करें, खुशहाल जीवन जीएं।

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