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केंद्र ने हिमाचल को बल्क ड्रग फार्मा पार्क का दिया तोहफा, 15 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
शिमला। केंद्र सरकार (Central government) की ओर से हिमाचल बल्क ड्रग पार्क का तोहफा दिया गया है। इस पार्क के बन जाने से अब फार्मा कंपनियों (Pharma Companies) को राहत मिलेगी। क्योंकि अब इन फार्मा कंपनियों को कच्चे माल के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यह कच्चा माल अब उन्हें हिमाचल (Himachal) में ही मिल जाएगा। यह बल्क ड्रग पार्क ऊना (Una) में स्थापित किया जा रहा है। बल्क ड्रग पार्क (Bulk Drug Park) बन जाने से बीबीएन में स्थापित फार्मा हब को बहुत बड़ी राहत मिलने वाली है। केंद्र सरकार ने इसी के साथ गुजरात और आंध्र प्रदेश को भी यह सौगात दी है। इसके लिए हिमाचल ने बहुत प्रयास किया था और हिमाचल सरकार इसके लिए लगातार केंद्र से पैरवी भी कर रही थी।

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इस बल्क ड्रग पार्क के मिल जाने को प्रदेश आर्थिक तरक्की के रूप में भी देखा जा रहा है। क्योंकि एक ओर इसके बन जाने से रोजगार के साधन तो सृजित होंगे ही, साथ में प्रदेश में स्थापित उद्योग जगत को भी इससे बहुत ज्यादा फायदा मिलेगा। कुल-मिलाकर फार्मा उद्योग अब कच्चा माल (Raw Material) हिमाचल से ही प्राप्त कर सकेगा जिससे उसका खर्चा भी बचेगा और समय भी बचेगा।
सीएम जयराम ने जताया केंद्र का आभार, कहा- 15 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
सीएम जयराम ठाकुर ने राज्य को बल्क ड्रग फार्मा पार्क आवंटित करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है। जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के लिए राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना का आवंटन वास्तव में एक महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि यह राज्य में कई वर्षों के लिए फार्मा फॉर्मूलेशन इकाइयों के प्रतिधारण के साथ-साथ स्थानीय रोजगार के अवसर सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों को बल्क ड्रग फार्मा पार्क आवंटित करने का मुख्य उद्देश्य घरेलू निर्माण, दवा सुरक्षा सुनिश्चित करना और चीन पर बल्क ड्रग की निर्भरता कम करना है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 21 मार्च, 2020 को बल्क ड्रग पार्क योजना को मंजूरी दी थी और बाद में 21 जुलाई, 2020 को प्रस्ताव जमा करने के लिए मूल्यांकन मानदंड निर्धारित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए थे। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार भारत सरकार के फार्मा विभाग (डीओपी) द्वारा 1000 करोड़ रुपये की अधिकतम सीमा के साथ परियोजना लागत का 90 प्रतिशत प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्क की अनुमानित परियोजना लागत लगभग 1200 करोड़ रुपये है, जिसमें से सामान्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा 1000 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया जाएगा और इस पार्क में लगभग 8000 से 10,000 करोड़ रुपये का अनुमानित निवेश अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि इससे लगभग 15 हजार से 20 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।
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