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महेंद्र सिंह को ना तो बागवानी कोई समझ है और ना ही वो बागवानों के हितैषी हैः राठौर

सुरेश भारद्वाज को भी दी चेतावनी- भाषा की मर्यादा ना भूलें मंत्री

महेंद्र सिंह को ना तो बागवानी कोई समझ है और ना ही वो बागवानों के हितैषी हैः राठौर

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शिमला। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर( Congress state president Kuldeep Singh Rathore ) ने बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उनके बयानों से साफ है कि वह ना तो बागवानी की कोई समझ रखते है और ना ही उनके हितेषी है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि खुले में सेब बेचने वाला बागवानी मंत्री का बयान जले पर नमक छिड़कने जैसा। ऐसा संभव ही नही है कि कोई बागवान सेब की ट्रे लेकर सड़क किनारे बैठ कर अपनी फसल बेचें। उन्होंने बागवानी मंत्री को अपने इस बयान के लिए बागवानों से माफी मांगने को कहा। राठौर ने शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज( Urban Development Minister Suresh Bhardwaj) को भी आड़े हाथ लेते हुए उन्हें अपनी भाषा मे सयंम रखने और सोच समझ कर उनपर कोई टीका टिप्पणी करने के प्रति सचेत किया। उन्होंने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि उनकी शालीनता की परीक्षा लेने की भूल न करें। उन्होंने कहा कि वह बताए कि शिमला जिला से सम्बंध रखने के बाबजूद शहरी विकास मंत्री ने बागवानों के हितों की रक्षा के लिए क्या किया।

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अडानी बागवानों का शोषण कर रहा है

राठौर ने कहा कि सेब के गिरते दामों को लेकर बागवान हताश है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। राठौर ने सरकार पर बागवानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अडानी को सरकार ने कोल्ड स्टोरेज के लिए जमीन लीज पर इस अनुबंध के साथ दी थी कि वह बागवानों के हितों की पूरी रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि आज यही अडानी बागवानों का शोषण कर रहा है । उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और इसको लेकर मोर्चा खोलेगी। राठौर ने कहा की एचपीएमसी की नीतियां भी बागवानी विरोधी है।एचपीएमसी ने अपने कोल्ड स्टोर निजी हाथों में किराए पर दे दिए है। उन्होंने कहा की बागवानो को इन कोल्ड स्टोरेज में अपनी सेब की फसल रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। राठौर ने बीजेपी नेताओं के प्रदेश में नए जिलों के गठन के प्रस्ताव और विचार को महज एक चुनावी शगूफा बताया। सरकार पहले यह बताए कि नए जिलों के प्रस्ताव की कार्य योजना क्या है। इसके लिए पैसा कहां से आएगा। सीएम जहां-जहां उपचुनाव है, वहां सब तहसीलें, उपमंडल कार्यालय खोल व अन्य कई घोषणाएं कर रहें है,जबकि प्रदेश सरकार के पास पैसा ही नहीं है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन भत्ते कर्ज लेकर दिए जा रहें है। राठौर ने सरकार के जनमंच कार्यक्रम फिर से शुरू करने पर सवाल किया कि एक तरफ कोरोना की तीसरी लहर का डर वहीं जनमंच कार्यक्रम शुरू ? क्या इससे कोरोना नही फैलेगा।

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