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चिंतनीय: महामारी के इस दौर में भी दुनिया के 300 करोड़ लोगों के पास नहीं है साबुन से हाथ धोने की सुविधा

कोरोना काल के दौरान लोगों को दी जा रही है ज्यादा से ज्यादा हाथ साफ करने की सलाह

चिंतनीय: महामारी के इस दौर में भी दुनिया के 300 करोड़ लोगों के पास नहीं है साबुन से हाथ धोने की सुविधा

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नई दिल्ली। चीन के वुहान से उपजे कोरोना वायरस (Coronavirus) में विश्व भर में उत्पात मचा रखा है। एक तरफ जहां विश्व भर के लाखों लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। वही जो लोग अभी तक इस जानलेवा वायरस के साए से बचे हुए हैं वह अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए हर प्रकार के उपाय करते नजर आ रहे हैं। इस सबके बीच सभी को लगातार और कुछ समय के अंतराल पर हाथ धुलने की सलाह दी जा रही है। जिसकी वजह से इस महामारी के दौर में हाथ धुलना (Hand Wash) सबसे जरूरी कामों में से एक हो गया है। हालांकि अभी दुनिया में करोड़ों लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए साबुन (Soap) और साफ पानी से हाथ धोना एक सपने जैसा है। साल 2019 की यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ की साझा मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में 30 करोड़ ऐसे भी लोग हैं जिनके पास हाथ धोने के लिए संसाधन नहीं मौजूद हैं।


भारत में सिर्फ 60 प्रतिशत लोगों के पास मौजूद हैं हाथ धुलने के संसाधन

इस रिपोर्ट में बताई गई जनसंख्या पूरी दुनिया का 40 फ़ीसदी हिस्सा है। वही कोरोना वायरस के इस गंभीर दौर में यह संख्या काफी बड़ी मालूम पड़ती है जिनके पास हाथ धोने के लिए पर्याप्त साफ पानी और साबुन तक नहीं है। यूनिसेफ के भारतीय प्रतिनिधि द्वारा इस बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि जैसे-जैसे महामारी फैलती जा रही है यह याद रखना बेहद जरूरी हो गया है कि हाथ धोना अब एक व्यक्तिगत पसंद नहीं बल्कि सामाजिक अनिवार्यता है। प्रतिनिधि द्वारा आगे बताया गया कि कोरोना वायरस और दूसरे इंफेक्शन से खुद को बचाने के लिए इस प्रक्रिया को अपनाया जा सकता है और यह सबसे सस्ती प्रक्रियाओं में से एक है। भारत में पानी से हाथ धोने की सुविधाएं एक बड़ी चिंता का विषय है।

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इस रिपोर्ट में आगे जानकारी देते हुए बताया गया कि भारत के सिर्फ 60% परिवारों के पास ही हाथ धोने के लिए साबुन की सुविधा है। वहीं भारत के ग्रामीण इलाकों में यह सुविधा या तो ना के बराबर है या फिर बहुत कम है। वहीं अगर विश्वव्यापी तौर पर देखा जाए तो 5 में से 3 लोगों के पास ही हाथ धोने की आधारभूत सुविधाएं मौजूद हैं। बता दें कि इससे पहले राष्ट्रीय सैंपल सर्वे 2019 की रिपोर्ट के अनुसार खाना खाने से पहले 25.3 फ़ीसदी ग्रामीण परिवार और 56 फ़ीसदी शहरी परिवार साबुन या अन्य किसी डिटर्जेंट से अपने हाथ धोते हैं। वही खाना खाने से पहले करब 2.7 फ़ीसदी लोग राख रेत या मिट्टी का इस्तेमाल कर अपने हाथ धोते हैं।

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