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हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को जारी किया नोटिस, जाने क्यों

मनाली बाइकर्स एसोसिएशन की बाइक को सरचू में रोकने से जुड़े मामले पर किए आदेश

हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को जारी किया नोटिस, जाने क्यों

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शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट ने मनाली बाइकर्स एसोसिएशन (Manali Bikers Association) की बाइक को सरचू में रोकने से जुड़े मामले में राज्य सरकार को नोटिस (Notice) जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश ए ए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि पर्यटक (Tourist) उनकी बाइक किराये पर लेते हैं और लद्दाख घूमने जाते है, लेकिन उनकी बाइक को लद्दाख बाइकर्स  ऑपरेटिव प्राइवेट लिमिटेड  द्वारा सरचू नामक स्थान पर ही रोक किया जाता है। मजबूरन पर्यटकों को लद्दाख बाइकर्स  ऑपरेटिव प्राइवेट लिमिटेड  की बाइक किराये पर लेनी पड़ती है। जिससे प्रार्थी  को काफी नुकसान होता है। आरोप लगाया गया है कि लद्दाख बाइकर्स  ऑपरेटिव प्राइवेट लिमिटेड  ने धमकी दी है कि प्रार्थी एसोसिएशन की बाइक को नुकसान पहुंचाया जाएगा।

हाईकोर्ट ने छात्रों से अधिक फीस वसूलने पर लगाए जुर्माने पर लगाई रोक

शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट (Himachal HighCourt) ने महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय (एमएमयू) व मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल कुमारहट्टी द्वारा छात्रों से अधिक फीस वसूल करने पर प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग द्वारा लगाये गए 45 लाख रुपए के जुर्माने पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश अहमद ए सैयद व न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात यह आदेश पारित किये। मामले से जुड़े तथ्यों के अनुसार आयोग ने जांच के पश्चात पाया था कि वर्ष 2012 से 2020 की अवधि के दौरान लगभग 1100 एमबीबीएस छात्रों से 103 करोड़ 96 लाख 53 हजार रुपए की अतिरिक्त टयूशन फीस वसूली गई है। इस कारण मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज कुमारहट्टी पर आयोग की ओर से 45 लाख का जुर्माना लगाया गया।

यह भी पढ़ें:हिमाचल हाईकोर्ट: एमसी शिमला चुनाव के लिए पुन सीमांकन के आदेशों पर बड़ा फैसला

जुर्माना लगाए जाने के आदेश को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई है। याचिका में दलील दी गयी है कि प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग की ओर से पारित आदेशो पर पूर्ण कोरम द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। आयोग की ओर से अदालत (Court) को बताया गया कि आयोग के दो सदस्यों में से जिन्होंने इस मामले की सुनवाई की थी। एक सदस्य शशिकांत शर्मा ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए क्योंकि उनकी बेटी भी विश्वविद्यालय में नामांकित थी। आयोग ने उक्त वसूली सबंधी आदेश वर्ष 2013-14 बैच की एमबीबीएस छात्रा निवेदिता राव व यामिनी की शिकायत पर पारित किए थे। शिकायत की गई थी कि हालांकि उन्होंने अतिरिक्त टयूशन फीस की वसूली को लेकर शुरू में ही विरोध किया था, लेकिन उन्हें ये कहकर धमकाया गया कि फीस न जमा करने पर डिग्री नहीं पूरी होने दी जाएगी।

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