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हिमाचल: सेब की सियासत पर सब एक, मंच पर जुटे सभी दलों के नेता, विपक्ष ने सरकार को घेरा

संयुक्त किसान मोर्चा के किसान संवाद में सभी पार्टियों के नेताओं ने लिया हिस्सा

हिमाचल: सेब की सियासत पर सब एक, मंच पर जुटे सभी दलों के नेता, विपक्ष ने सरकार को घेरा

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शिमला। सेब (Apple) पर सियासी धार पड़नी शुरू हो गई है। आगे उपचुनाव (By Election) है। इससे ठीक एक साल बाद विधानसभा चुनाव (Assembly Election) का बिगुल बजने वाला है। ऐसे में हिमाचल (Himachal) की छोटी से लेकर बड़ी पार्टियां खुद को बागवान हितैषी दिखाने में रत्ती भर कोर-कसर बांकी रहने नहीं देना चाहती। इस कारण सभी पार्टियों के नेता शिमला (Shimla) के कालीबाड़ी हॉल में जुटे। इस बैठकी का बुलावा संयुक्त किसान मोर्चा ने दिया था। इस बैठकी
में सेब के गिरते दाम को लेकर वामपंथ (Left) से दक्षिणपंथ (Right) तक के नेता मंच पर दिखे।

केंद्र पर साधा निशाना

इस मौके पर किसान सभा के राज्य अध्यक्ष और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य कुलदीप सिंह तंवर ने कहा केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कुलदीप तंवर ने कहा कि केंद्र सरकार जो एमएसपी 23 फसलों पर देती है, उसमें हिमाचल में उगने वाले मुख्य फल और सब्ज़ियाँ शामिल नहीं है। ऐसे में प्रदेश के कई किसान तबाह हो रहे हैं। उन्हें उनकी फसलों का उचित दाम बाजार में नहीं मिलते। लागत मूल्य की वसूली भी नहीं हो पाती।

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सरकार का आढ़तियों पर कंट्रोल नहीं

कंवर ने कहा कि अब सेब सीजन जब चरम पर है। एकाएक मंडियों में सेब के दाम गिर गए। सरकार का सेब खरीदने वाली कम्पनियों, आढ़तियों, लदानियों पर कोई नियंत्रण नहीं है। वो अपनी मनमर्जी से दाम घटाते और बढ़ाते हैं। ऐसे में हिमाचल के बागवान परेशान हैं। सरकार मूकदर्शक बनकर देख रही है। उन्होंने सरकार को ललकारते हुए कहा कि अगर सरकार यूं ही मूक दर्शक बनी रही तो 90 के दशक जैसे आंदोलन खड़े किए जाएंगे।

सब प्रायोजित था

कुलदीप तंवर ने राकेश टिकैत के हिमाचल दौरे पर कहा कि वह किसानों के सम्मानित नेता हैं। वह किसानों और बागबानों से जुड़े मुद्दों को उठाने हिमाचल आए थे, लेकिन उनके साथ जो व्यवहार किया गया वह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यह सब प्रायोजित था, जिसकी वह कड़ी निंदा करते हैं।

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सरकार पल्ला झाड़ रही

इस मौके को कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भी भरपूर भुनाने की कोशिश की। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि
वह विधायक होने के साथ-साथ एक बागवान भी हैं। बागवानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना उनका पहला कर्तव्य है। बागवानों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर वह इस संयुक्त किसान मंच की बैठक में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा की सेब के गिरते दामों पर सरकार पल्ला झाड़ रही है। बागवानी मंत्री चुप्पी साधे बैठे हैं, ऐसे में सरकार को इसका खामियाजा आने वाले उपचुनाव में भुगतना पड़ेगा।

बीजेपी नेता भी हुईं शामिल

वहीं, बैठक में शामिल बीजेपी नेता नीलम सरेक ने कहा कि सयुंक्त किसान मंच के तहत सभी लोग इस किसान संवाद में शामिल हुए हैं। बागवानी क्षेत्र में जो समस्याएं आ रही है, उसको लेकर सरकार ठोस नीति बनाए। अब बागवानों को भी अपने हकों के लिये लड़ाई लड़ने की ज़रूरत है।

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