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महाशिवरात्रि : मन मुताबिक वरदान देते भोले नाथ

महाशिवरात्रि : मन मुताबिक वरदान देते भोले नाथ

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महाशिवरात्रि को किसी भी अन्य पर्व, व्रत एवं विधान से बढ़कर माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि सभी अन्य पर्व मिलकर भी महाशिवरात्रि की तुलना में कम ही हैं। यह पर्व सबसे बड़ा है यदि किसी भक्त के मन में कोई इच्छा है और वह महाशिवरात्रि के दिन उसे पूर्ण करने के लिए पूरी श्रद्धा से भगवान भोले की आराधना करें तो ऐसा माना जाता है कि उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है। महाशिवरात्रि का दिन सबसे पहले उन कन्याओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जिनकी शादी नहीं हुई है। महाशिवरात्रि भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह का दिन है इसलिए विवाह से जुड़ी सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए इस दिन पूजा करना शुभ माना गया है। यदि किसी कारणवश किसी कन्या का विवाह नहीं हो रहा हो, तो उसे महाशिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। इस दिन व्रती को फल, पुष्प, चंदन, बिल्वपत्र, धतूरा, धूप, दीप और नैवेध से चारों प्रहर की पूजा करनी चाहिए।


व्रती को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको मिलाकर पंचामृत से शिव स्नान कराकर जल से अभिषेक करना चाहिए। चारों प्रहर के पूजन में शिव पंचाक्षर “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का जाप करें। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्ग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से भगवान शिव को पुष्प अर्पित करें और उनकी आरती उतारकर परिक्रमा करें।

मन मुताबिक वरदान चाहते हैं तो …

यदि आप भगवान शिव से मन मुताबिक वरदान चाहते हैं तो शिवरात्रि की पूजा के दौरान इस मंत्र का सही उच्चारण सहित जाप करें – ॐ ऐं ह्रीं शिव गौरीमव ह्रीं ऐं ॐ
घर में सुख-शांति एवं महिलाएं यदि सौभाग्य के लिए भोले शंकर से वरदान मांगना चाहती हैं तो भगवान शिव की पूजा करके दुग्ध की धारा से अभिषेक करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें – ॐ ह्रीं नम: शिवाय ह्रीं ॐ

मध्यरात्रि के दिन शिव मनुष्य के निकट

यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इसे हर साल फाल्गुन माह में 13वीं रात या 14वें दिन मनाया जाता है। इस त्योहार में श्रद्धालु पूरी रात जागकर भगवान शिव की आराधना में भजन गाते हैं। कुछ लोग पूरे दिन और रात उपवास भी करते हैं। शिवलिंग को जल और बेलपत्र चढ़ाने के बाद ही वे अपना उपवास तोड़ते हैं। महिलाओं के लिए शिवरात्रि का विशेष महत्व है। अविवाहित युवतियां भगवान शिव से प्रार्थना करती हैं कि उन्हें उनके जैसा ही पति मिले। वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति और परिवार के लिए मंगल कामना करती हैं। सभी पौराणिक कथाओं में नीलकंठ की कहानी सबसे ज्यादा चर्चित है। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही समुद्र मंथन के दौरान कालकेतु विष निकला था। भगवान शिव ने संपूर्ण ब्राह्मांड की रक्षा के लिए स्वंय ही सारा विष पी लिया था। इससे उनका गला नीला पड़ गया और उन्हें नीलकंठ के नाम से जाना गया।
एक मान्यता यह भी है कि फाल्गुन माह का 14वां दिन भगवान शिव का प्रिय दिन है इसलिए महाशिवरात्रि को इसी दिन मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार महाशिवरात्रि ही वह दिन है, जब भगवान शिव ने पार्वती से विवाह रचाया था। कहते हैं कि जब कोई महिला भगवान शिव से प्रार्थना करती है तो भगवान शिव उनकी प्रार्थना को आसानी से स्वीकार कर लेते हैं। भगवान शिव की पूजा में किसी विशेष सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती है। सिर्फ जल और बेलपत्र के जरिए भी श्रद्धालु भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। यही वजह है कि महाशिवरात्रि का महिलाओं के लिए विशेष महत्व है। ऐसा मानना है कि अगर अविवाहित महिला महाशिवरात्रि के दिन उपवास करती है तो उन्हें भगवान शिव जैसा ही पति मिलता है। ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर भगवान मानवजाति के काफी निकट आ जाते हैं। मध्यरात्रि के समय ईश्वर मनुष्य के सबसे ज्यादा निकट होते हैं। यही कारण है कि लोग शिवरात्रि के दिन रातभर जागते हैं।

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