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कागजों में खर्च लाखों, मौके पर ‘जीरो’,चंबा में 22 वन अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिरी विजिलेंस की गाज
MGNREGA Alleged Scams: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से मनरेगा (MGNREGA) कार्यों में एक बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। वन परिक्षेत्र तीसा, मसरूंड और टिकरीगढ़ में मनरेगा कार्यों के निष्पादन और भुगतान में हुए लाखों रुपये के कथित घोटाले में वन विभाग के 22 अधिकारी और कर्मचारी विजिलेंस के रडार पर आ गए हैं। विजिलेंस की प्रारंभिक जांच में इन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिसके बाद सभी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। नामजद आरोपियों में तत्कालीन रेंज ऑफिसर (RO), ब्लॉक ऑफिसर (डिप्टी रेंजर) और वनरक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) शामिल हैं।
आपराधिक षड्यंत्र रचकर 55 लाख से अधिक का गबन
विजिलेंस जांच, तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट और बयानों से खुलासा हुआ है कि आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपस में मिलकर एक आपराधिक षड्यंत्र रचा। सरकारी दस्तावेजों में वास्तविक कार्य और प्रयुक्त सामग्री से कई गुना अधिक कार्य दर्शाया गया और जाली दस्तावेजों के आधार पर सरकारी खजाने से भुगतान प्राप्त कर लिया गया।इस पूरी धांधली के जरिए कुल ₹55,01,782 (55.01 लाख रुपये) के सरकारी धन का गबन और दुरुपयोग किया गया है।
ऐसे खुला भ्रष्टाचार का पिटारा: 2019 में हुई थी शिकायत
इस घोटाले की परतें साल 2019 में उधड़नी शुरू हुईं, जब जिला परिषद सदस्य और स्थानीय ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों में धांधली की शिकायतें दर्ज कराईं। डीसी चंबा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘जिला ग्रामीण विकास अभिकरण’ (DRDA) के पास जांच के लिए भेजा।डीआरडीए की तकनीकी समिति ने तीनों वन परिक्षेत्रों में कराए गए 41 मनरेगा कार्यों का गहन निरीक्षण किया।जांच में 41 में से 32 कार्यों में गंभीर तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं।
कागजों में खर्च लाखों, मौके पर ‘शून्य’
जांच रिपोर्ट के अनुसार, तीसा रेंज के ‘सीओ लैंड डेवलपमेंट वर्क एट गुवाड़ी सेकेंड’ में सामग्री मद में ₹1.96 लाख का खर्च दिखाया गया था। लेकिन जब स्थल का पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) किया गया, तो मौके पर सामग्री का उपयोग पूरी तरह शून्य (Zero) पाया गया।
22 आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में FIR दर्ज
विजिलेंस को विभागीय जांच की पुष्टि मिलने के बाद, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत सक्षम प्राधिकारी से केस दर्ज करने की अनुमति मांगी गई। अनुमति मिलते ही तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
विजिलेंस की जांच तेज़, हो सकते हैं और बड़े खुलासे
विजिलेंस ब्यूरो ने मामले का पूरा रिकॉर्ड, वित्तीय भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत भूमिका की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी का कहना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में शामिल आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं तथा मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।
राहुल कुमार
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